देहरादून। उत्तराखंड में जनगणना प्रक्रिया के पहले चरण के तहत चल रही डिजिटल भवन स्व-गणना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। राज्य में 24 अप्रैल तक नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कराने का अवसर दिया गया है, जिसके बाद 25 अप्रैल से प्रगणक घर-घर जाकर डेटा संग्रह का कार्य शुरू करेंगे।
जनगणना विभाग के अनुसार, स्व-गणना के इस चरण में अब केवल कुछ ही दिन शेष हैं। इसके बाद नियुक्त प्रगणक प्रत्येक घर तक पहुंचकर न केवल जानकारी एकत्र करेंगे, बल्कि स्व-गणना के दौरान हुई संभावित त्रुटियों को भी मौके पर ही सुधारेंगे।
लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर स्पष्ट निर्देश
जनगणना में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए भी विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यदि कोई जोड़ा साथ रह रहा है, लेकिन खुद को विवाहित के रूप में दर्ज नहीं कराना चाहता, तो उसे ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। जनगणना में वही जानकारी दर्ज की जाएगी, जो नागरिक अपनी इच्छा से प्रदान करेंगे।
विदेश में रह रहे भारतीय नहीं होंगे शामिल
जनगणना प्रक्रिया में केवल भारत की सीमाओं के भीतर रह रहे नागरिकों को ही शामिल किया जाएगा। जो भारतीय नागरिक इस दौरान विदेश में रह रहे हैं, उनकी गणना नहीं की जाएगी। हालांकि, उनके परिवारजन उनकी सामान्य जानकारी साझा कर सकते हैं, लेकिन आधिकारिक गणना में उन्हें शामिल नहीं किया जाएगा।
24 अप्रैल तक ही मिलेगा स्व-गणना का मौका
जनगणना निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि स्व-गणना के लिए वेबसाइट पर उपलब्ध सुविधा केवल 24 अप्रैल तक ही सक्रिय रहेगी। इसके बाद 25 अप्रैल से प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे।
जिन नागरिकों ने पहले ही स्व-गणना पूरी कर ली है, उन्हें अपनी एसई (Self Enumeration) आईडी प्रगणक को बतानी होगी, जिससे उनकी पूरी जानकारी तुरंत सिस्टम में उपलब्ध हो जाएगी।
इस कार्य के लिए प्रदेशभर में एक बड़ी टीम तैनात की गई है, जिसमें 4,491 सुपरवाइजर और 26,348 प्रगणक शामिल हैं। कुल मिलाकर 30,839 कर्मियों की टीम इस अभियान को सफल बनाने में जुटी है।
गलत पिनकोड या लोकेशन की चिंता नहीं
डिजिटल स्व-गणना के दौरान कई लोगों को यह चिंता रही कि यदि उन्होंने गूगल मैप पर लोकेशन गलत दर्ज कर दी या पिनकोड में गलती हो गई, तो उसे कैसे सुधारा जाएगा। इस पर जनगणना निदेशक ने स्पष्ट किया कि एक बार फॉर्म फाइनल सबमिट होने के बाद ऑनलाइन सुधार संभव नहीं होगा।
हालांकि, जब प्रगणक घर पर भौतिक सत्यापन के लिए पहुंचेगा, तब वह इन सभी त्रुटियों को मौके पर ही ठीक कर देगा।
अब तक 41 हजार से अधिक लोगों ने की स्व-गणना
प्रदेश में 10 अप्रैल से शुरू हुई डिजिटल भवन स्व-गणना में अब तक अच्छा प्रतिसाद देखने को मिला है। सोमवार शाम 5 बजे तक कुल 41,731 लोगों ने अपनी स्व-गणना पूरी कर ली है।
जिलावार आंकड़ों के अनुसार—
अल्मोड़ा में 3,650, बागेश्वर में 2,643, चमोली में 1,433, चंपावत में 1,920, देहरादून में 7,151, पौड़ी में 2,113, हरिद्वार में 5,233, नैनीताल में 6,733, पिथौरागढ़ में 2,414, रुद्रप्रयाग में 693, टिहरी में 1,460, ऊधमसिंह नगर में 4,191 और उत्तरकाशी में 2,097 लोगों ने स्व-गणना पूरी की है।
जनगणना को लेकर प्रशासन सतर्क
प्रशासन का कहना है कि जनगणना देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक है, जो नीतियों और योजनाओं के निर्माण का आधार बनती है। ऐसे में नागरिकों से अपील की गई है कि वे समय रहते अपनी जानकारी सही और पूरी तरह दर्ज कराएं, ताकि भविष्य की योजनाएं अधिक प्रभावी ढंग से तैयार की जा सकें।



