देहरादून।
समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू होने के बाद उत्तराखंड में विवाह पंजीकरण को लेकर अभूतपूर्व जागरूकता देखने को मिल रही है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में विवाह पंजीकरण की संख्या में 24 गुना तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि यूसीसी लागू होने के बाद आम जनता में कानूनी प्रक्रियाओं और अधिकारों को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जहां समान नागरिक संहिता को लागू किया गया। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने यूसीसी लागू करने का संकल्प लिया था, जिसे सत्ता में आने के बाद उन्होंने पूरा किया। सरकार बनने के बाद पहली ही कैबिनेट बैठक में राज्य में यूसीसी लागू करने का निर्णय लिया गया। सभी आवश्यक औपचारिकताओं और जनमत संग्रह की प्रक्रिया पूरी करने के बाद प्रदेश में 27 जनवरी 2025 से यूसीसी कानून प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया।
यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में उल्लेखनीय तेजी आई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 27 जनवरी 2025 से जुलाई 2025 तक मात्र छह माह की अवधि में विवाह पंजीकरण की संख्या तीन लाख से अधिक पहुंच गई है। इसके विपरीत, वर्ष 2010 में लागू पुराने विवाह पंजीकरण अधिनियम के तहत 26 जनवरी 2025 तक कुल मिलाकर करीब 3.30 लाख विवाह पंजीकरण ही हो पाए थे।
यदि प्रतिदिन के औसत पर नजर डालें तो पुराने अधिनियम के तहत प्रतिदिन औसतन केवल 67 विवाह पंजीकरण होते थे, जबकि यूसीसी लागू होने के बाद यह औसत बढ़कर 1634 प्रतिदिन तक पहुंच गया है। यह आंकड़े स्पष्ट रूप से बताते हैं कि यूसीसी ने विवाह पंजीकरण को लेकर लोगों की सोच और व्यवहार में बड़ा बदलाव लाया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस फैसले को सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और समान अधिकारों की दिशा में उठाया गया ऐतिहासिक और साहसिक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य सभी नागरिकों को—विशेष रूप से महिलाओं को—समान अधिकार और सम्मान प्रदान करना है।
यूसीसी के अंतर्गत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप और इससे जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल किया गया है। इस कानून में महिला और पुरुष दोनों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु निर्धारित की गई है, वहीं सभी धर्मों में तलाक और अन्य पारिवारिक प्रक्रियाओं के लिए भी सख्त और समान प्रावधान किए गए हैं। इसके लागू होने से महिलाओं को बहुविवाह, हलाला जैसी कुप्रथाओं से मुक्ति मिली है, जिससे सामाजिक सुधार की दिशा में एक मजबूत संदेश गया है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करना राज्य सरकार का ऐतिहासिक निर्णय है। यूसीसी का उद्देश्य किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार, समान अवसर और समान सम्मान देना है। विवाह पंजीकरण में आई यह अभूतपूर्व वृद्धि दर्शाती है कि जनता ने इस कानून को स्वीकार किया है और इसे एक सकारात्मक सामाजिक सुधार के रूप में देखा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में अन्य राज्य भी उत्तराखंड के इस मॉडल को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।



