उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद हरिद्वार जिले से हलाला का पहला मामला सामने आया है। रुड़की के भगवानपुर तहसील अंतर्गत बुग्गावाला थाना क्षेत्र में दर्ज एक मामले में पुलिस ने जांच के बाद हलाला को भी अपराध मानते हुए अपनी चार्जशीट में शामिल किया है। इसे यूसीसी लागू होने के बाद राज्य ही नहीं, बल्कि देशभर में एक अहम कानूनी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, 04 अप्रैल 2026 को एक विवाहिता ने बुग्गावाला थाना पहुंचकर अपने पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए तहरीर दी थी। पीड़िता ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से उसे लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। महिला ने पति पर तीन तलाक देने, दहेज की मांग को लेकर उत्पीड़न करने, मारपीट करने और घर से निकालने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया कि उसके साथ जबरन हलाला कराया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। इस मामले में पति दानिश, ससुर शहीद, जेठ मोहम्मद अरशद, देवर प्रवेज और जावेद, सास गुलशाना, ननद सलमा और ननदोई फैजान को आरोपी बनाया गया था।
शुरुआत में पुलिस ने मुस्लिम विवाह अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था। लेकिन विवेचना के दौरान पुलिस को ऐसे तथ्य और साक्ष्य मिले, जिनसे हलाला से जुड़े आरोपों की पुष्टि होने की बात सामने आई। इसके बाद पुलिस ने यूसीसी के प्रावधानों के तहत हलाला और तीन तलाक को भी अपराध की श्रेणी में शामिल करते हुए अपनी चार्जशीट दाखिल कर दी।
जांच के दौरान देहरादून निवासी रहमान का नाम भी सामने आया, जिसके बाद उसे भी मामले में आरोपी बनाया गया है। इस तरह अब मामले में कुल नौ लोगों को नामजद किया गया है।
हरिद्वार के एसएसपी नवनीत भुल्लर ने बताया कि मूल एफआईआर में यूसीसी की धाराएं शामिल नहीं थीं। हालांकि जांच के दौरान मिले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर मामले में यूसीसी के अंतर्गत तीन तलाक और हलाला से संबंधित प्रावधानों को शामिल करते हुए चार्जशीट दाखिल की गई है।
उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद यह पहला मामला है, जिसमें पुलिस ने हलाला को अपराध मानते हुए कानूनी कार्रवाई की है। इस मामले को लेकर प्रदेश में कानूनी और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।



