नई दिल्ली।
टीवी पत्रकारिता से राजनीति में आए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर और कार्यशैली को लेकर एक रोचक अनुभव साझा किया है। शुक्ला ने बताया कि जब नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी के महासचिव के तौर पर संगठन में सक्रिय थे, तब भी वह अपने साथ एक छोटा कंप्यूटर रखा करते थे। इससे उनकी तकनीक के प्रति रुचि और योजनाबद्ध कार्यशैली का अंदाजा लगाया जा सकता है।
राजीव शुक्ला ने एक एजेंसी को दिए साक्षात्कार में कहा कि यह अनुभव उस समय का है, जब वह लोकप्रिय टीवी कार्यक्रम ‘रूबरू’ के लिए नरेंद्र मोदी का साक्षात्कार लेने गए थे। यह मुलाकात दिवंगत भाजपा नेता अरुण जेटली के आवास पर हुई थी। शुक्ला के अनुसार, संभवतः यह नरेंद्र मोदी का शुरुआती टीवी इंटरव्यू था।
इंटरव्यू के दौरान दिखी संगठनात्मक सोच
शुक्ला ने बताया कि साक्षात्कार के दौरान उन्होंने देखा कि नरेंद्र मोदी अपने साथ एक छोटा कंप्यूटर लाए हुए थे। उस समय भी वह पूरी तैयारी के साथ आए थे और हर सवाल का जवाब बेहद सोच-समझकर दे रहे थे। शुक्ला के मुताबिक, तब नरेंद्र मोदी पार्टी में एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक चेहरा थे और संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
नहीं लगा था कि बनेंगे मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री
जब राजीव शुक्ला से पूछा गया कि क्या उस समय उन्हें आभास हुआ था कि नरेंद्र मोदी भविष्य में मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री बनेंगे, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें ऐसा बिल्कुल नहीं लगा था। शुक्ला के अनुसार, इंटरव्यू के दौरान मोदी ने खुद कहा था कि वह चुनावी राजनीति में नहीं आना चाहते और संगठनात्मक कार्यों में ही अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि उस दौर में अरुण जेटली पार्टी के बैकग्राउंड मैनेजमेंट में बेहद कुशल माने जाते थे, जबकि नरेंद्र मोदी पूरी तरह संगठन के व्यक्ति थे, जो यह जानते थे कि पार्टी को राज्यों में कैसे मजबूत किया जाए और चुनाव कैसे जीते जाएं।
हालातों ने बदला राजनीतिक रास्ता
राजीव शुक्ला ने बताया कि नरेंद्र मोदी ने स्वयं कहा था कि परिस्थितियों के चलते उन्हें गुजरात जाना पड़ा। वहीं से उनके राजनीतिक जीवन की दिशा बदली और शासन की राजनीति में उनका प्रवेश हुआ।
नरेंद्र मोदी ने 1995 से भाजपा के राष्ट्रीय सचिव के रूप में काम किया और हरियाणा व हिमाचल प्रदेश में पार्टी की गतिविधियों को संभाला। बाद में संगठन महासचिव के तौर पर उन्होंने 1998 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई।
सितंबर 2001 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के फोन कॉल ने उनके जीवन में नया मोड़ ला दिया और वह गुजरात के मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री के रूप में करीब 13 वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने विकास और सुशासन पर विशेष जोर दिया। इसके बाद 26 मई 2014 को उन्होंने देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।
तकनीक के इस्तेमाल पर खास जोर
प्रधानमंत्री बनने के बाद भी नरेंद्र मोदी को तकनीक-प्रेमी नेता के रूप में जाना जाता है। उन्होंने शासन को अधिक पारदर्शी और जन-सुलभ बनाने के लिए तकनीक के अधिकतम उपयोग पर बल दिया, जिससे आम लोगों के जीवन को आसान बनाया जा सके।
कांग्रेस में रिश्तों पर कोई रोक नहीं
एक सवाल के जवाब में राजीव शुक्ला ने कहा कि भाजपा नेताओं से उनके व्यक्तिगत संबंधों को लेकर कांग्रेस पार्टी या गांधी परिवार ने कभी कोई आपत्ति नहीं जताई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी में विचार और संबंधों को लेकर काफी आजादी है।
गौरतलब है कि राजीव शुक्ला वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं और इसके साथ ही वह बीसीसीआई के उपाध्यक्ष तथा कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य भी हैं। वह पूर्व में केंद्रीय मंत्री और आईपीएल के चेयरमैन भी रह चुके हैं।



