हरिद्वार।
आगामी वर्ष 2027 में प्रस्तावित हरिद्वार कुंभ मेले को लेकर धार्मिक संगठनों की मांगें सामने आने लगी हैं। श्री गंगा सभा ने गंगा घाटों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग उठाई है। गंगा सभा का कहना है कि कुंभ मेले को गैर हिंदू प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया जाए और इसे विधिवत रूप से ‘हिंदू क्षेत्र’ घोषित किया जाना चाहिए। संगठन का तर्क है कि इससे न केवल कुंभ मेले की दिव्यता और भव्यता बनी रहेगी, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया जा सकेगा।
प्रेस क्लब हरिद्वार में आयोजित पत्रकार वार्ता में श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी हरिद्वार की धार्मिक मर्यादा को संरक्षित करने के लिए ऐसे नियम मौजूद रहे हैं। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों के शासनकाल में भी हरिद्वार नगर पालिका क्षेत्र में गैर हिंदुओं के ठहरने और व्यवसाय करने पर प्रतिबंध था। ऐसे में समय की मांग है कि आगामी कुंभ मेले से पहले गंगा घाटों और धार्मिक स्थलों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई जाए।
नितिन गौतम ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2027 में हरिद्वार में दिव्य और भव्य कुंभ आयोजित किए जाने की घोषणा सराहनीय है। वर्ष 2021 के कुंभ मेले में कोरोना महामारी के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान से वंचित रह गए थे। वर्ष 2027 में ऐसे श्रद्धालुओं को पुनः अवसर मिलेगा, जिससे सनातन संस्कृति को बल मिलेगा और स्थानीय व्यापार एवं पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि हरिद्वार नगर पालिका के बायलॉज के अनुसार नगर पालिका क्षेत्र को गैर हिंदू, मद्य और मांस निषेध क्षेत्र घोषित किया गया है। सरकार को इन बायलॉज का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित कराना चाहिए, ताकि तीर्थ नगरी की पवित्रता और मर्यादा बनी रह सके।
संत समाज में मिली-जुली प्रतिक्रिया
गंगा सभा और तीर्थ पुरोहितों की इस मांग पर संत समाज की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ संतों ने इस मांग का समर्थन किया, जबकि कुछ ने इसे व्यावहारिक नहीं बताया।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि कुंभ मेला क्षेत्र को गैर हिंदुओं के लिए पूरी तरह वर्जित करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि कुंभ एक विशाल आयोजन है, जिसमें व्यवस्थाओं के संचालन के लिए विभिन्न वर्गों की सहभागिता रहती है।
वहीं, कुछ संतों ने इस मांग को उचित ठहराया। उनका कहना है कि जब वेटिकन सिटी में गैर ईसाइयों के लिए सख्त नियम लागू हैं, तो हरिद्वार जो देश की आध्यात्मिक राजधानी है, वहां भी इस प्रकार के प्रावधान किए जा सकते हैं। महामंडलेश्वर ज्योतिर्मयानंद ने कहा कि सनातन धर्म ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना रखता है, लेकिन जब साजिश के तहत धर्म और आस्था को अपवित्र करने के प्रयास होते हैं, तब इस तरह की मांगें जायज प्रतीत होती हैं।
फिलहाल, गंगा सभा की इस मांग ने कुंभ 2027 को लेकर धार्मिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर एक नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार और प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाते हैं।



