हल्द्वानी।
दोपहर का एक सामान्य दिन उस समय मातम में बदल गया, जब तेज रफ्तार बस ने एक मासूम बच्ची की जिंदगी छीन ली। इस दर्दनाक हादसे ने न सिर्फ एक परिवार की खुशियां उजाड़ दीं, बल्कि पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। मासूम कनक की मौत की खबर मिलते ही उसके पिता का निवाला मुंह तक पहुंचते-पहुंचते थम गया और परिवार गहरे सदमे में डूब गया।
पीलीभीत निवासी 35 वर्षीय जीवन लाल, जो डेढ़ साल पहले रोजी-रोटी की तलाश में रानीबाग आए थे, मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। करीब तीन महीने पहले ही उन्होंने अपनी पत्नी, दो बेटों और इकलौती बेटी कनक को अपने पास बुलाया था। दिनभर की मेहनत के बाद बेटी की मुस्कान ही उनकी सबसे बड़ी राहत थी, लेकिन सोमवार को एक तेज रफ्तार बस ने उनकी इस खुशी को हमेशा के लिए छीन लिया।
बताया जा रहा है कि घटना के समय जीवन लाल घर पर खाना खा रहे थे। तभी अचानक उन्हें हादसे की सूचना मिली। जैसे ही उन्हें अपनी बेटी के दुर्घटनाग्रस्त होने का पता चला, उनका हाथ थम गया और वे बदहवास हालत में सड़क की ओर दौड़ पड़े। वहां पहुंचकर उन्होंने अपनी लाडली को सड़क पर बेसुध हालत में पड़ा देखा, जिसे देखकर उनका कलेजा फट गया।
दो भाइयों की इकलौती बहन थी कनक
कनक अपने दो भाइयों—पांच वर्षीय विशाल और दो वर्षीय सार्थक—की इकलौती बहन थी। हाल ही में गांव से रानीबाग आने के बाद वह रोज उत्साह के साथ आंगनबाड़ी केंद्र जाती थी। सोमवार को भी वह अपने भाई और मौसी के बच्चों के साथ केंद्र से लौट रही थी, तभी यह हादसा हुआ।
प्रत्यक्षदर्शियों ने किया था चालक को सतर्क
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चारों बच्चे सड़क पार कर रहे थे। उसी दौरान नैनीताल की ओर से आ रही तेज रफ्तार बस को देखकर आसपास मौजूद लोगों ने चालक को धीमा चलने का इशारा किया, लेकिन चालक ने लापरवाही बरती और बस ने मासूम को अपनी चपेट में ले लिया।
20 मीटर तक घसीटती रही बस
हादसा इतना भयावह था कि बच्ची बस के पहिए में फंस गई और चालक तेज रफ्तार के कारण उसे करीब 20 मीटर तक घसीटता रहा। इस दौरान बच्ची का शरीर बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया और सड़क पर खून फैल गया। बस रुकने तक मासूम ने दम तोड़ दिया था।
मां का रो-रोकर बुरा हाल
घटना के बाद करीब सवा 12 बजे बच्ची का शव एंबुलेंस में रखा गया। मां राजकुमारी शव के पास बैठकर लगातार बिलखती रही। वह बार-बार यही कहती रही—“मेरी बेटी को लौटा दो, मैं उसके बिना कैसे जिऊंगी।” इस मंजर को देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
गुस्साई भीड़ ने बस पर किया पथराव
हादसे के बाद बस रुकते ही उसमें सवार यात्री बाहर निकल गए। चालक की लापरवाही से नाराज भीड़ ने बस पर पथराव कर दिया, जिससे बस के शीशे टूट गए। हालांकि सभी यात्री सुरक्षित बाहर निकल चुके थे। चालक मौके से फरार हो गया।
पोस्टमार्टम हाउस में छलका दर्द
पोस्टमार्टम हाउस में खड़े जीवन लाल को हर कोई सांत्वना दे रहा था, लेकिन वह बार-बार अपनी बेटी को याद कर भावुक हो उठते थे। उनके शब्द टूट रहे थे और आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। घर पर उनकी अधूरी थाली देर शाम तक वैसे ही पड़ी रही, जो इस हादसे के दर्द को बयां कर रही थी।
यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और लापरवाही से वाहन चलाने के खतरनाक परिणामों की ओर इशारा करता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।



