हरिद्वार। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने हरिद्वार में आनंद धर्मशाला ट्रस्ट द्वारा निर्मित नव निर्मित धर्मशाला का लोकार्पण किया। इस अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षत्रिय कलौता समाज ने सदैव अपने परिश्रम, साहस और संस्कारों के बल पर समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने समाज के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि खेती, व्यापार, शिक्षा, समाज सेवा और देश की सुरक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में इस समाज के लोगों ने उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सेना, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल तथा अन्य सुरक्षा बलों में सेवाएं देकर समाज के वीर सपूत राष्ट्र की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत बना रहे हैं। उन्होंने श्री आनंद धर्मशाला ट्रस्ट द्वारा धार्मिक जागरण, सांस्कृतिक संरक्षण और मानव कल्याण के लिए किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि आनंद धर्मशाला सेवा, समर्पण और परोपकार की भावना का जीवंत उदाहरण है।
सीएम धामी ने कहा कि Haridwar भारत की आध्यात्मिक चेतना और सनातन संस्कृति का प्रवेश द्वार है, जहां देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु मां गंगा की गोद में आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धर्मशाला का निर्माण एक पुण्य और सराहनीय कार्य है, जो आगामी कुंभ और चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगी।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले हरिद्वार कुंभ को लेकर भी सरकार की तैयारियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के मार्गदर्शन में राज्य सरकार हरिद्वार कुंभ को भव्य, दिव्य और सुरक्षित बनाने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। घाटों के पुनरुद्धार, सड़क व्यवस्था, स्वच्छता, यातायात प्रबंधन और मूलभूत सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि हर श्रद्धालु को सुरक्षित और सुव्यवस्थित अनुभव मिल सके।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं से विशेष अपील भी की। उन्होंने कहा कि इस समय चारधाम यात्रा अपने चरम पर है और राज्य सरकार यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए हर संभव व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने यात्रियों से अनुरोध किया कि वे पंजीकरण कराने के बाद ही यात्रा शुरू करें, ताकि यात्रा व्यवस्था सुचारु बनी रहे और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।



