देहरादून। उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। प्रदेश के मैदानी जिलों में हालात यह हैं कि लोगों को रोजाना चार से पांच घंटे तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। बिजली की मांग में तेजी से हो रही बढ़ोतरी के कारण आपूर्ति और मांग के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है।
ऊर्जा निगम की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को राज्य में बिजली की मांग इस महीने के रिकॉर्ड स्तर को पार करते हुए 4.7 करोड़ यूनिट से अधिक पहुंच गई। खास बात यह है कि प्रदेश में हर दिन लगभग 10 लाख यूनिट बिजली की अतिरिक्त मांग बढ़ रही है, जिससे व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
उपलब्धता की बात करें तो राज्य पूल से करीब 93 लाख यूनिट और केंद्रीय पूल से लगभग 1.5 करोड़ यूनिट बिजली प्राप्त हुई। इस तरह कुल मिलाकर करीब 2.4 करोड़ यूनिट बिजली ही उपलब्ध हो सकी। शेष मांग को पूरा करने के लिए उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) को खुले बाजार और अन्य स्रोतों से बिजली खरीदनी पड़ी। इसके बावजूद करीब 24 लाख यूनिट बिजली की कमी बनी रही, जिसके चलते विभाग को मजबूरन कटौती करनी पड़ी।
कटौती का सबसे ज्यादा असर मैदानी और औद्योगिक क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। हरिद्वार के ग्रामीण इलाकों में लगभग साढ़े तीन घंटे तक बिजली गुल रही, जबकि ऊधमसिंह नगर के ग्रामीण क्षेत्रों में करीब दो घंटे की कटौती की गई। इसके अलावा लंढौरा, मंगलौर, लक्सर, बहादराबाद, ढकरानी, सेलाकुई, सहसपुर, विकासनगर, डोईवाला, कोटद्वार, ज्वालापुर, जसपुर, किच्छा, खटीमा, रामनगर, गदरपुर और बाजपुर जैसे कस्बों में एक से दो घंटे की घोषित कटौती लागू की गई।
औद्योगिक क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा। स्टील फर्नेश से जुड़े उद्योगों में 10 घंटे से अधिक की बिजली कटौती की गई, जिससे उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मौसम के तापमान में लगातार वृद्धि के कारण आने वाले दिनों में बिजली की मांग और बढ़ सकती है। यदि आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो कटौती का दायरा और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।



