देहरादून/उत्तरकाशी। आगामी चारधाम यात्रा को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। यमुनोत्री धाम के पैदल मार्ग पर घोड़े-खच्चरों के संचालन को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए इस वर्ष एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की जाएगी।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शाम छह बजे के बाद पैदल मार्ग पर घोड़े-खच्चरों का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इसके साथ ही पशुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और पशु क्रूरता रोकने को लेकर कड़े प्रावधान लागू किए जाएंगे।
🛑 पशु क्रूरता पर सख्ती, उल्लंघन पर दर्ज होगा मुकदमा
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने जिला पंचायत और पशुपालन विभाग को संयुक्त रूप से एसओपी तैयार करने के निर्देश दिए हैं। दोनों विभाग जल्द ही पैदल मार्ग का संयुक्त निरीक्षण करेंगे।
प्रशासन ने साफ किया है कि:
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जानवरों से निर्धारित सीमा से अधिक कार्य लेने पर कार्रवाई होगी।
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अतिरिक्त बोझ डालने या अमानवीय व्यवहार करने पर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
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नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस निरस्त करने तक की कार्रवाई संभव है।
हर वर्ष यमुनोत्री पैदल मार्ग पर लगभग 3500 से 4000 घोड़े-खच्चर यात्रियों को धाम तक पहुंचाने और वापस लाने में लगाए जाते हैं। पिछले वर्ष करीब 3600 पशुओं का पंजीकरण हुआ था। मुनाफा कमाने की होड़ में कई बार संचालक पशुओं से अधिक काम लेते हैं, जिससे उनकी हालत बिगड़ती है और कई मामलों में मौत तक हो जाती है।
🐎 स्वास्थ्य और सुविधा के लिए विशेष इंतजाम
नई एसओपी के तहत निम्न व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी:
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मार्ग में घोड़े-खच्चरों के लिए गर्म पानी और चारे की नियमित व्यवस्था
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बीमार या घायल पशुओं के लिए त्वरित चिकित्सा सुविधा
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पशुओं की मृत्यु की स्थिति में दफनाने के लिए निर्धारित स्थान चिन्हित
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पशुचिकित्सकों की तैनाती और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण
मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी एचएस बिष्ट ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर एसओपी का प्रारूप तैयार किया जा रहा है, जिसे जल्द अंतिम रूप दिया जाएगा।
⏳ एक समय में 600 पशुओं को ही अनुमति
भीड़ नियंत्रण और पशुओं पर दबाव कम करने के लिए प्रशासन ने संख्या भी तय की है:
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एक बार में अधिकतम 600 घोड़े-खच्चरों को ही ट्रैक पर जाने की अनुमति होगी।
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इनमें से 100 पशुओं के जानकीचट्टी लौटने के बाद ही अन्य पशुओं को आगे जाने की इजाजत मिलेगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यात्रा मार्ग पर भीड़ कम करना और पशुओं के स्वास्थ्य पर अनावश्यक दबाव को रोकना है।
🎯 प्रशासन का उद्देश्य
जिला प्रशासन का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य:
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यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
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पशुओं के साथ मानवीय व्यवहार को बढ़ावा देना
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यात्रा व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और नियंत्रित बनाना
चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु यमुनोत्री धाम पहुंचते हैं। ऐसे में इस बार प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि यात्रा सुचारू संचालन के साथ-साथ पशु संरक्षण भी प्राथमिकता में रहेगा।



