उत्तराखंड: रफ्तार के दावे में फेल हुई लग्जरी कार, उपभोक्ता आयोग ने लैंड रोवर को 1.65 करोड़ रुपये लौटाने का दिया आदेश

देहरादून। महंगी लग्जरी कारों के विज्ञापनों में किए जाने वाले दावों पर अब उपभोक्ता आयोग सख्त रुख अपनाता दिख रहा है। एक अहम फैसले में राज्य उपभोक्ता आयोग ने Jaguar Land Rover की डिफेंडर कार को लेकर किए गए भ्रामक दावे को गंभीर मानते हुए कंपनी को ग्राहक को पूरी कीमत 1.65 करोड़ रुपये ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है।

मामला कार की रफ्तार से जुड़े विज्ञापन दावे का है। कंपनी ने दावा किया था कि यह कार 6.1 सेकेंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है, लेकिन वास्तविक परीक्षण में कार को यह गति हासिल करने में 7.1 सेकेंड से भी अधिक समय लगा। इसे उपभोक्ता आयोग ने भ्रामक विज्ञापन करार दिया।

आयोग की पीठ, जिसकी अध्यक्षता कुमकुम रानी और सदस्य बीएस मनराल ने की, ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि महंगी कीमत का मतलब यह नहीं कि कंपनी गुणवत्ता और वादों से समझौता कर सकती है।

कार में कई खामियां भी आईं सामने
शिकायतकर्ता मैसर्स इप्रो ग्लोबल लिमिटेड ने 27 मार्च 2024 को 1.65 करोड़ रुपये में Land Rover Defender खरीदी थी। खरीद के बाद कार में कई तकनीकी खामियां भी सामने आईं।

  • फ्यूल टैंक का ढक्कन सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम के साथ काम नहीं कर रहा था
  • कार के नीचे से असामान्य आवाजें आ रही थीं
  • डीलर द्वारा बिना अनुमति चेसिस में कटिंग और वेल्डिंग की गई

आयोग ने इन सभी बिंदुओं को गंभीर मानते हुए इसे मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट की श्रेणी में रखा।

चेसिस से छेड़छाड़ को माना गंभीर दोष
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि चेसिस किसी भी वाहन की रीढ़ होती है और इसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ वाहन की मूल गुणवत्ता को प्रभावित करती है। डीलर द्वारा बिना ग्राहक की अनुमति के चेसिस में बदलाव करना गंभीर लापरवाही है।

हालांकि कंपनी ने तर्क दिया कि यह कार्य डीलर स्तर पर हुआ है, लेकिन आयोग ने इस दलील को खारिज करते हुए पूरी जिम्मेदारी Jaguar Land Rover India Limited पर तय की।

ब्याज और मुकदमे का खर्च भी देना होगा
आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह 1.65 करोड़ रुपये की पूरी राशि 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए। इसके अलावा कंपनी को 50 हजार रुपये मुकदमे का खर्च भी शिकायतकर्ता को देना होगा।

उपभोक्ताओं के लिए मिसाल बना फैसला
यह फैसला न केवल लग्जरी कार कंपनियों के लिए चेतावनी है, बल्कि उपभोक्ताओं के अधिकारों को भी मजबूत करता है। आयोग ने साफ किया कि किसी भी उत्पाद के प्रचार में किए गए दावे सटीक और पारदर्शी होने चाहिए, अन्यथा कंपनियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

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