मसूरी। पहाड़ों में खुले में फेंका जा रहा प्लास्टिक कचरा अब केवल गंदगी ही नहीं, बल्कि वन्यजीवों के लिए जानलेवा खतरा बनता जा रहा है। इसका ताजा और चिंताजनक उदाहरण मसूरी के बाटाघाट क्षेत्र में सामने आया, जहां भोजन की तलाश में निकले एक हिमालयन पाम सिवेट का सिर प्लास्टिक के जार में फंस गया।
घटना जबरखेत नेचर रिजर्व के पास बाटाघाट की है। कूड़े के ढेर में खाने की तलाश कर रहा यह दुर्लभ वन्यजीव अचानक प्लास्टिक जार में फंस गया और उससे निकलने के लिए इधर-उधर भटकने लगा। जार सिर में फंसने के कारण न तो वह ठीक से देख पा रहा था और न ही खुद को मुक्त कर पा रहा था।
इसी दौरान वहां टहलने निकले प्रसिद्ध अंग्रेज़ी लेखक Stephen Alter की नजर इस संकट में फंसे पाम सिवेट पर पड़ी। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने धैर्य और सावधानी के साथ जानवर को बचाने का प्रयास किया। स्टीफन ऑल्टर के अनुसार, काफी देर तक संघर्ष करने के बाद जब पाम सिवेट थककर एक जगह बैठ गया, तब वह धीरे-धीरे उसके पास पहुंचे और बड़ी मुश्किल से उसके सिर से प्लास्टिक जार निकालने में सफल रहे।
जार से मुक्त होते ही पाम सिवेट कुछ देर रुका और फिर जंगल की ओर चला गया। इस दौरान उसे कोई गंभीर चोट नहीं आई, जो राहत की बात रही।
घटना के बाद स्टीफन ऑल्टर ने पहाड़ों में बढ़ते प्लास्टिक कचरे पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मसूरी सहित पर्वतीय इलाकों में जगह-जगह खुले में फेंका गया प्लास्टिक न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि वन्यजीवों के लिए भी घातक साबित हो रहा है। कई बार जानवर भोजन की तलाश में प्लास्टिक के डिब्बों, जार और थैलियों में फंस जाते हैं, जिससे उनकी जान तक चली जाती है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि प्लास्टिक कचरे को खुले में न फेंकें और जिम्मेदार नागरिक की तरह उसका सही निस्तारण करें। यह घटना एक चेतावनी है कि यदि समय रहते हम नहीं संभले, तो पहाड़ों की जैव विविधता को गंभीर खतरे का सामना करना पड़ सकता है।



