उत्तराखंड में बदला रहेगा मौसम का मिजाज, कई जिलों में तेज हवाओं और बिजली चमकने का येलो अलर्ट

देहरादून। उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रदेश के कई जिलों में शनिवार को तेज हवाएं चलने और बिजली चमकने की संभावना जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के भी आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार आगामी 17 मई तक प्रदेशभर में मौसम का मिजाज बदला रह सकता है।

मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के मुताबिक देहरादून समेत उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, अल्मोड़ा, टिहरी और पिथौरागढ़ जिलों के कुछ हिस्सों में तेज गर्जना के साथ बिजली चमक सकती है। इसके अलावा लगभग 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना भी जताई गई है। इसे देखते हुए विभाग ने संबंधित जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि 4500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी होने की संभावना बनी हुई है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगातार मौसम परिवर्तन का असर तापमान पर भी देखने को मिल रहा है।

मौसम खुलते ही बढ़ी गर्मी

मई महीने की शुरुआत से ही प्रदेश में रुक-रुक कर बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी का दौर जारी रहा, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली हुई थी। विशेष रूप से मैदानी इलाकों में तापमान सामान्य से नीचे बना रहा। हालांकि शुक्रवार को मौसम साफ होने और चटक धूप निकलने के बाद गर्मी ने फिर से तेवर दिखाने शुरू कर दिए।

देहरादून में दिन का अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य के आसपास रहा। दिनभर तेज धूप और उमस के कारण लोगों को गर्मी का अहसास हुआ। हालांकि शाम के समय हवाएं चलने से मौसम सुहावना हो गया और रात के तापमान में गिरावट महसूस की गई।

उधर, पर्वतीय जिलों में अब भी तापमान सामान्य से नीचे बना हुआ है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और विशेषकर ऊंचाई वाले क्षेत्रों की यात्रा करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है।

Previous articleरुद्रप्रयाग में चंद्रशिला-तुंगनाथ मार्ग पर आकाशीय बिजली गिरने से दो घायल, महिला के सिर में गंभीर चोट
Next articleउत्तराखंड के 108 नगर निकायों की बदलेगी तस्वीर, एनआईयूए करेगा व्यापक अध्ययन; आय बढ़ाने से लेकर मानव संसाधन तक बनेगी नई रणनीति