उत्तराखंड के कई इलाकों में हुई बेमौसमी बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की तैयार गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। कटाई के समय हुई बारिश के कारण खेतों में सुखाने के लिए फैलाई गई कटी फसल भीग गई, जबकि खड़ी फसल तेज हवा के झोंकों से गिरकर खराब होने की कगार पर पहुंच गई है। इस अचानक बदले मौसम ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है और अब फसल खराब होने का खतरा मंडरा रहा है।
कृषि विभाग के अनुसार जिले में लगभग 19 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की खेती होती है और इस समय अधिकांश खेतों में फसल कटाई के लिए तैयार खड़ी थी। कई स्थानों पर किसानों ने फसल काटकर खेतों में सुखाने के लिए फैला दी थी, लेकिन मंगलवार से बुधवार दोपहर तक हुई बारिश ने इन फसलों को भी नुकसान पहुंचा दिया।
कई क्षेत्रों में फसल गिरकर खराब
पंचायत घर, बेलबाबा और गौलापार सहित आसपास के क्षेत्रों में किसानों की कटी फसल बारिश में भीग गई, जबकि खड़ी फसल तेज हवाओं के कारण खेतों में गिर गई। किसानों का कहना है कि यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ और धूप नहीं निकली तो गेहूं के दाने काले पड़ने की आशंका है, जिससे फसल पूरी तरह खराब हो सकती है।
कृषि विभाग के प्रारंभिक आकलन के अनुसार बेमौसमी बारिश से 15 से 30 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है, हालांकि किसानों का दावा है कि कई जगहों पर नुकसान 50 प्रतिशत से भी अधिक है।
किसानों का दर्द
मोहन जोशी, किसान (हरिपुर मोतिया) ने बताया कि उन्होंने 15 बीघा में गेहूं बोया था और मजदूर लगाकर 10 बीघा की फसल काट ली थी। लेकिन बारिश के कारण कटी हुई फसल भीग गई। उन्होंने कहा कि यदि जल्द धूप नहीं निकली तो गेहूं के दाने काले पड़ जाएंगे और पूरी फसल खराब हो सकती है।
वहीं नरेंद्र सिंह मेहता, किसान (गौलापार) ने बताया कि उन्होंने करीब डेढ़ एकड़ में गेहूं की फसल काटकर सुखाने के लिए रखी थी। मंगलवार को धूप नहीं मिली और बुधवार को बारिश हो गई, जिससे पूरी फसल भीग गई। उन्होंने कहा कि दो-तीन दिन में मड़ाई कराने की योजना थी लेकिन अब नुकसान का खतरा बढ़ गया है।
मदन चंद्र, किसान (ओखलकांडा) का कहना है कि कटाई के समय बारिश होने से उनकी चार बीघा गेहूं की फसल खराब हो गई। इस बार अच्छी पैदावार और मुनाफे की उम्मीद थी, लेकिन बेमौसमी बारिश ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
बीमा योजना से मिल सकती है राहत
प्रभारी मुख्य कृषि अधिकारी गीतांजलि बंगारी ने बताया कि जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराया है, उन्हें 24 घंटे के भीतर बीमा कंपनी को नुकसान की सूचना देनी होगी। इसके बाद नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि तहसील से पटवारी, कृषि और उद्यान विभाग की संयुक्त टीम नुकसान का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसे शासन को भेजा जाएगा।
वहीं मुख्य कृषि अधिकारी रितु टम्टा के अनुसार मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में गेहूं की फसल को 15 से 30 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है और राजस्व विभाग द्वारा नुकसान का आकलन किया जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।
फलों और सब्जियों को भी नुकसान
नैनीताल जिले में बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से फल और सब्जी की खेती भी प्रभावित हुई है। पेड़ों में आए फूल झड़ गए हैं जिससे उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है।
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने बताया कि फलों और आलू की खेती को नुकसान की सूचना मिली है। उन्होंने कृषि और उद्यान विभाग को प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
भीमताल, धारी, ओखलकांडा, रामगढ़, धानाचूली, मुक्तेश्वर और बेतालघाट क्षेत्रों में बारिश और ओलावृष्टि के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय किसानों हरेंद्र सिंह और नरेंद्र बिष्ट ने बताया कि आड़ू, प्लम, खुबानी और नाशपाती के पेड़ों से फल झड़ गए हैं।
इसके अलावा कालाढूंगी, कोटाबाग और बैलपड़ाव सहित कई ग्राम सभाओं में गेहूं, चना, मसूर और जौ की फसल को भी भारी नुकसान हुआ है।
आम और लीची के लिए राहत
जहां एक ओर बारिश ने गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाया है, वहीं रामनगर क्षेत्र में यह बारिश आम और लीची की फसल के लिए फायदेमंद साबित हुई है।
रामनगर में लगभग 1100 हेक्टेयर में लीची और 900 हेक्टेयर में आम की खेती होती है। उद्यान अधिकारी एएस परवाल ने बताया कि इस मौसम में पेड़ों पर धूल और गंदगी जमा हो जाती है, जिससे रोगों का खतरा बढ़ जाता है। बारिश से पेड़ साफ हो गए हैं और रोगों का खतरा कम हो गया है, जिससे बेहतर उत्पादन की उम्मीद है।
मुख्य उद्यान अधिकारी प्रेमा राणा ने बताया कि धानाचूली क्षेत्र का निरीक्षण किया गया है। फसलों और फलों को नुकसान पहुंचा है और इसकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसके आधार पर किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।



