उत्तराखंड में यूसीसी सेवाओं का डिजिटल विस्तार: एआई की मदद से 23 भाषाओं में पंजीकरण सुविधा, तकनीकी उत्कृष्टता का बना मॉडल

देहरादून। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के सफल क्रियान्वयन को लेकर राज्य सरकार लगातार तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा दे रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि यूसीसी के तहत सेवाओं को आमजन के लिए सरल, सुलभ और पारदर्शी बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसी का परिणाम है कि आज यूसीसी की सेवाएं अंग्रेजी सहित भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे कुल 23 भाषाओं में नागरिकों को सुविधा मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि यूसीसी लागू करने से पहले ही अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि पंजीकरण प्रक्रिया को अत्यंत सरल रखा जाए, ताकि किसी भी नागरिक को आवेदन करने में किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसके साथ ही वेबसाइट को पूरी तरह यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है, ताकि लोग स्वयं ही बिना किसी तकनीकी बाधा के अपना पंजीकरण कर सकें।

इस दिशा में सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) द्वारा यूसीसी की आधिकारिक वेबसाइट को आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में विकसित किया गया है। इनमें असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, उर्दू, सिंधी, बोडो, डोगरी, मैथिली, संथाली और मणिपुरी के साथ अंग्रेजी भाषा शामिल है।

इस बहुभाषी व्यवस्था के तहत आवेदक अपनी मातृभाषा में न केवल यूसीसी के नियमों, प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि उसी भाषा में आवेदन भी कर सकते हैं। खास बात यह है कि पूरी प्रक्रिया को समझने और पंजीकरण में सहायता के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का भी उपयोग किया जा रहा है, जिससे तकनीकी रूप से कम जानकार लोग भी आसानी से सेवाओं का लाभ उठा सकें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “हमारी सरकार पहले दिन से ‘सरलीकरण से समाधान’ के मूलमंत्र पर काम कर रही है। समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन में यह सुनिश्चित किया गया कि आम लोगों को पंजीकरण में किसी भी तरह की कठिनाई न आए। यूसीसी आज तकनीकी उत्कृष्टता का एक सफल उदाहरण बनकर उभरी है। यही कारण है कि बीते एक वर्ष में यूसीसी की प्रक्रिया को लेकर एक भी शिकायत सामने नहीं आई है।”

राज्य सरकार का मानना है कि बहुभाषी और एआई आधारित यह व्यवस्था न केवल डिजिटल इंडिया की अवधारणा को मजबूती देती है, बल्कि सुशासन की दिशा में उत्तराखंड को एक आदर्श राज्य के रूप में भी स्थापित करती है।

Previous articleSmart Meter पर बिजली बोर्ड का स्पष्टीकरण: स्मार्ट मीटर से नहीं बढ़ेगा बिजली बिल, 125 यूनिट मुफ्त बिजली रहेगी जारी
Next articleउत्तराखंड में मौसम का अलर्ट: 23 जनवरी को बारिश और बर्फबारी के आसार, सभी एजेंसियों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश