देहरादून। उत्तराखंड में आरक्षित वन भूमि के आवंटन से जुड़े मामलों की जांच के लिए राज्य सरकार ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मंजूरी के बाद यह निर्णय लिया गया है। राज्य के सभी जिलों में जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई है, जो आरक्षित वन भूमि के गैर-वानिकी कार्यों के लिए किए गए आवंटन की जांच करेगी।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने मई 2025 में पुणे में आरक्षित वन भूमि से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस विषय में महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। शीर्ष अदालत ने आदेश दिया था कि यह पता लगाने के लिए प्रत्येक राज्य एसआईटी का गठन करे कि कहीं आरक्षित वन भूमि को गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए निजी व्यक्तियों या संस्थाओं को आवंटित तो नहीं किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में उत्तराखंड सरकार ने अब यह कदम उठाया है। सरकार के अनुसार, राजस्व विभाग के अधीन आने वाली आरक्षित वन भूमि, जिसे पूर्व में किसी निजी व्यक्ति या संस्था को गैर-वानिकी कार्यों के लिए आवंटित किया गया है, उसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी। इसके लिए जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में विशेष जांच टीमें बनाई गई हैं, जो अपने-अपने जिलों में ऐसे मामलों की पड़ताल करेंगी।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे स्पष्ट निर्देश
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि आरक्षित वन भूमि का उपयोग गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है, तो ऐसी भूमि का कब्जा वापस लेकर वन विभाग को सौंपा जाए। इसके साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी निर्देश दिया गया था कि इस प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।
हालांकि, अदालत ने यह भी कहा था कि यदि किसी विशेष परिस्थिति में भूमि का कब्जा वापस लेना व्यापक जनहित में उचित नहीं माना जाता है, तो संबंधित सरकारें उस भूमि की बाजार कीमत उन व्यक्तियों या संस्थाओं से वसूल सकती हैं, जिन्हें वह भूमि आवंटित की गई थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि इस वसूली से प्राप्त धनराशि का उपयोग वनों के संरक्षण और विकास के कार्यों में किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक वर्ष का समय भी दिया था। इसी क्रम में उत्तराखंड सरकार ने अब एसआईटी का गठन कर जांच प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।



