उत्तराखंड में बजट की कमी के चलते यातायात व्यवस्था और पुलिस थानों में तैनात 2900 पीआरडी (प्रांतीय रक्षक दल) स्वयंसेवकों की सेवाएं इस महीने से समाप्त कर दी गई हैं। निदेशालय युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल के निर्देश पर सभी जिलों के युवा कल्याण एवं पीआरडी अधिकारियों ने यह आदेश जारी किया है।
दरअसल, मई 2024 में चारधाम यात्रा के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों में पीआरडी स्वयंसेवकों की तैनाती की गई थी। इसके लिए सरकार द्वारा 32 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था। बजट अवधि समाप्त होने के बाद अब विभाग के पास इन जवानों की ड्यूटी जारी रखने के लिए धनराशि उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते उनकी सेवाएं खत्म करनी पड़ी हैं।
चारधाम यात्रा के बाद भी ली जा रही थी सेवाएं
पीआरडी निदेशालय के निदेशक आशीष चौहान के अनुसार, चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की ड्यूटी लगाई गई थी। यात्रा समाप्त होने के बाद भी आवश्यकता के अनुसार कुछ स्वयंसेवकों से सेवाएं ली जाती रहीं, लेकिन अब बजट समाप्त होने के कारण ड्यूटी जारी रखना संभव नहीं है।
10 हजार से अधिक पीआरडी स्वयंसेवक, 7514 तैनात
प्रदेश में कुल 10 हजार से अधिक पीआरडी स्वयंसेवक पंजीकृत हैं, जिनमें से वर्तमान में 7514 स्वयंसेवक विभिन्न विभागों में ड्यूटी पर थे। इनमें 908 महिलाएं और 6608 पुरुष शामिल हैं। ये स्वयंसेवक पुलिस थानों और चौकियों के अलावा सचिवालय, विधानसभा, आबकारी विभाग, आरटीओ, मंडी समिति, समाज कल्याण, जल संस्थान, शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा जैसे कई विभागों में सेवाएं दे रहे थे।
अधिकारियों के मुताबिक, चारधाम यात्रा के लिए लगाए गए 2900 स्वयंसेवकों की ड्यूटी अब समाप्त कर दी गई है। हालांकि, विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ स्वयंसेवकों से भविष्य में फिर से काम लिया जा सकता है, जिसके लिए निदेशालय स्तर से सीमित बजट जारी किया गया है।
नई मांग पर ही लगेगी ड्यूटी
देहरादून के जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी प्रमोद चंद्र पाण्डेय ने बताया कि सरकार की बजट उपलब्धता और विभिन्न विभागों की मांग के अनुसार ही पीआरडी स्वयंसेवकों की ड्यूटी लगाई जाती है। दिसंबर तक के लिए स्वीकृति मिली थी, लेकिन अब नई मांग आने पर ही दोबारा तैनाती की जाएगी।
पीआरडी जवानों की नाराजगी
पीआरडी स्वयंसेवकों के हित संगठन ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है। प्रदेश संयोजक प्रमोद मंद्रवाल ने कहा कि—
“अधिकारियों के वेतन-भत्ते लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन हमारे नियमित रोजगार के लिए कुछ नहीं किया जा रहा। 1948 से यह विभाग अस्तित्व में है। उपनल कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन दिया गया, लेकिन हमें नजरअंदाज किया गया। जरूरत पड़ने पर ही हमसे काम लिया जाता है। शिवरात्रि और होली जैसे त्योहार आ रहे हैं, बच्चों की फीस और परिवार के भरण-पोषण की चिंता सता रही है।”
सामाजिक असर की आशंका
2900 पीआरडी जवानों की ड्यूटी समाप्त होने से जहां एक ओर यातायात व्यवस्था और विभागीय कार्यों पर असर पड़ने की आशंका है, वहीं दूसरी ओर सैकड़ों परिवारों की आर्थिक सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अब सभी की नजरें सरकार के अगले फैसले और नए बजट प्रावधान पर टिकी हुई हैं।



