उत्तराखंड में नई बिजली दरों के प्रस्ताव का विरोध, किसानों ने जताई चिंता
देहरादून। उत्तराखंड में प्रस्तावित नई बिजली दरों को लेकर किसानों और कृषि आधारित उद्यमियों का विरोध तेज हो गया है। पॉलीहाउस संचालकों और मशरूम उत्पादकों ने बिजली नियामक आयोग की जनसुनवाई में पहुंचकर नई टैरिफ व्यवस्था पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। किसानों का कहना है कि बढ़े हुए फिक्स चार्ज और नई दरों के कारण उनका व्यवसाय बंद होने की कगार पर पहुंच गया है।
आरटीएस-4 श्रेणी के उपभोक्ताओं ने आयोग से राहत की मांग करते हुए कहा कि यदि बिजली दरों में संशोधन नहीं किया गया तो प्रदेश में पॉलीहाउस और मशरूम उत्पादन जैसे कृषि सहायक व्यवसाय पूरी तरह समाप्त हो सकते हैं।
85 प्रतिशत पॉलीहाउस बंद होने का दावा
लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधि मनमोहन भारद्वाज ने जनसुनवाई के दौरान बताया कि कृषि सहायक सेवाओं के अंतर्गत स्थापित पॉलीहाउस पहले तेजी से बढ़ रहे थे, क्योंकि बिजली दरें अपेक्षाकृत सस्ती थीं। लेकिन नई टैरिफ व्यवस्था और फिक्स चार्ज लागू होने के बाद स्थिति बदल गई है।
उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में 85 प्रतिशत से अधिक पॉलीहाउस बंद हो चुके हैं। साथ ही प्रतिदिन पांच से छह घंटे के बिजली कटौती से उत्पादन पर गंभीर असर पड़ रहा है।
मशरूम उत्पादकों ने फिक्स चार्ज हटाने की मांग की
मशरूम उत्पादक अमित शर्मा ने कहा कि फिक्स चार्ज गलत तरीके से लागू किया गया है। उन्होंने बताया कि मशरूम उत्पादन पूरे साल समान स्तर पर नहीं चलता और सर्दियों में बिजली की खपत काफी कम रहती है। ऐसे में पूरे वर्ष के लिए समान फिक्स चार्ज लगाना अनुचित है।
उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल पहले ही बाहर से महंगे दामों पर आता है। यदि बिजली दरें इसी तरह बढ़ती रहीं तो उत्पादकों की आय पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
एमएसएमई और अन्य सेक्टर को सीजनल श्रेणी में शामिल करने की मांग
जनसुनवाई के दौरान राहुल देव ने एमएसएमई सेक्टर को सीजनल घोषित करने की मांग उठाई और फिक्स चार्ज में राहत देने की अपील की। कई उपभोक्ताओं ने फूड प्रोसेसिंग और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को भी अलग से सीजनल श्रेणी में शामिल करने का सुझाव दिया।
जनसुनवाई के अंत में आयोग के सदस्य (तकनीकी) प्रभात किशोर डिमरी ने कहा कि आयोग ने सभी पक्षों को ध्यानपूर्वक सुना है और अंतिम निर्णय उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
भारतीय किसान यूनियन ने भी जताया विरोध
जनसुनवाई में हरिद्वार, रुड़की और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के प्रतिनिधियों ने भी बिजली दर बढ़ोतरी का विरोध किया। यूनियन के प्रतिनिधि संजय चौधरी ने कहा कि सरकार किसानों से संवाद करे और उनकी आर्थिक स्थिति को समझे।
उन्होंने कहा कि किसान एक रुपये प्रति यूनिट से अधिक बिजली दर देने में सक्षम नहीं हैं। किसानों ने स्मार्ट मीटर लगाने का भी विरोध जताते हुए कहा कि गांवों में इसे लागू नहीं होने दिया जाएगा।
किसानों की चेतावनी
किसानों और कृषि उद्यमियों ने चेतावनी दी कि यदि बिजली दरों में राहत नहीं दी गई तो पॉलीहाउस, मशरूम उत्पादन और कृषि आधारित छोटे उद्योग बड़े संकट में आ जाएंगे, जिससे रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ेगा।



