उत्तराखंड में एलयूसीसी चिटफंड घोटाले पर सीबीआई का शिकंजा, पांच आरोपी गिरफ्तार

देहरादून। उत्तराखंड में बहुचर्चित एलयूसीसी चिटफंड धोखाधड़ी मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बुधवार को देश के अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर सीबीआई ने सुशील गोरखू, राजेंद्र सिंह बिष्ट, ममता भंडारी, गौरव रोहिला और तरुण कुमार मौर्य को हिरासत में लिया।

यह कार्रवाई पिछले वर्ष हाईकोर्ट के आदेश पर दर्ज की गई एफआईआर के बाद की गई है। सीबीआई लंबे समय से इस मामले की जांच और आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थी। एजेंसी अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर धन के लेनदेन और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।

छोटे निवेशकों से करोड़ों की ठगी

जांच में सामने आया है कि लोनी अर्बन मल्टी क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसायटी (एलयूसीसी) ने उत्तराखंड के हजारों लोगों से करीब 100 करोड़ रुपये की ठगी की। कंपनी ने लोगों को अधिक मुनाफे और सुरक्षित निवेश का झांसा देकर धन जमा कराया था।

सबसे अधिक प्रभावित वे लोग बताए जा रहे हैं जो निम्न आय वर्ग से जुड़े हैं। इनमें दिहाड़ी मजदूर, गृहणियां और छोटी बचत करने वाले लोग शामिल हैं। कई परिवारों ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी कंपनी में निवेश कर दी थी।

कई राज्यों में फैला था नेटवर्क

जांच एजेंसियों के अनुसार एलयूसीसी का नेटवर्क केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं था, बल्कि उत्तर प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों में भी फैला हुआ था। विभिन्न राज्यों में भी इसी प्रकार की धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज की गई हैं। कंपनी का मालिक नवी मुंबई का निवासी बताया गया है।

उत्तराखंड पुलिस की विभिन्न प्राथमिकी की जांच में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और निवेशकों को गुमराह करने के तथ्य सामने आए थे। इसके बाद पुलिस मुख्यालय स्तर से भी इस पूरे मामले की निगरानी की जा रही थी।

बड्स एक्ट के तहत दर्ज हुए मुकदमे

मामले में दर्ज सभी एफआईआर में धोखाधड़ी की धाराओं के साथ-साथ बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपोजिट स्कीम्स (BUDS) एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई थी। यही कारण है कि इन मामलों की सुनवाई स्पेशल बड्स एक्ट अदालत में चल रही थी।

हाईकोर्ट के आदेश पर शुरू हुई सीबीआई जांच

मार्च 2025 में ऋषिकेश निवासी एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी। इसके बाद एक अन्य पीआईएल भी दाखिल की गई। दोनों याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 17 सितंबर 2025 को मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए थे।

इसके बाद सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की और अब इस मामले में पहली बड़ी गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं।

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