देहरादून। उत्तराखंड में अवैध खनन पर सरकार की सख्ती और नई खनन नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से खनन राजस्व में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य सरकार के अनुसार, खनन से होने वाली सालाना आय अब लगभग चार गुना बढ़कर 1200 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इस बढ़े हुए राजस्व से प्रदेश की जनकल्याणकारी और विकास योजनाओं को गति मिल रही है।
सरकार ने खनन आवंटन और परिवहन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत ई-नीलामी के जरिए खनन लॉट आवंटित किए जा रहे हैं और खनन गतिविधियों की निगरानी सेटेलाइट प्रणाली से की जा रही है। इसके साथ ही पुलिस और प्रशासन को अवैध खनन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लागू की गई सख्त नीति का असर डेढ़ साल से भी कम समय में साफ दिखाई देने लगा है। जहां पहले खनन से राज्य को सालाना करीब 300 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता था, वहीं अब यह बढ़कर 1200 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।
सितंबर 2024 से लागू हुई नई खनन नीति
प्रदेश सरकार ने सितंबर 2024 में नई खनन नीति लागू की थी। इस नीति में कई तकनीकी और प्रशासनिक सुधार किए गए, जिनमें प्रमुख रूप से ई-नीलामी के माध्यम से खनन पट्टों का आवंटन, खनन स्थलों की सेटेलाइट निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और परिवहन नियंत्रण प्रणाली शामिल है। इन उपायों से अवैध खनन पर अंकुश लगा है और राजस्व संग्रह में पारदर्शिता आई है।
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद खनन गतिविधियों में जवाबदेही बढ़ी है और नियमों के उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हुई है।
उत्तराखंड को 200 करोड़ की विशेष केंद्रीय सहायता
खनन सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन के कारण उत्तराखंड को देशभर में दूसरा स्थान भी प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि के आधार पर केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए पूंजी निवेश हेतु राज्यों को दी जाने वाली विशेष सहायता योजना के तहत उत्तराखंड को 200 करोड़ रुपये की विशेष सहायता स्वीकृत की है।
पर्यावरण मानकों के अनुरूप खनन पर जोर
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आम लोगों और विकास परियोजनाओं के लिए खनन सामग्री की जरूरत को देखते हुए खनन कार्य पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप ही कराया जा रहा है। इसके लिए एक पारदर्शी और तकनीक आधारित तंत्र विकसित किया गया है।
मुख्यमंत्री धामी के अनुसार, पारदर्शी व्यवस्था और सख्ती के कारण राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं का बेहतर संचालन संभव हो पाया है।



