देहरादून।
उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश की बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लिया है। राज्य के तीनों प्रमुख ऊर्जा निगमों में उत्तर प्रदेश अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम, 1966 (एस्मा) लागू कर दिया गया है। इस संबंध में अधिसूचना जारी करते हुए सरकार ने हड़ताल को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। आदेश के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित संगठनों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह आदेश उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (UPCL), पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (PITCUL) और उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL) पर लागू होगा। इन तीनों निगमों को अत्यावश्यक सेवाओं की श्रेणी में रखते हुए किसी भी प्रकार की हड़ताल, कार्य बहिष्कार या आंदोलन को प्रतिबंधित किया गया है।
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यदि इसके बावजूद कोई संगठन या कर्मचारी हड़ताल करता है, तो उसके विरुद्ध एस्मा के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि प्रदेश में बिजली आपूर्ति, उत्पादन और ट्रांसमिशन से जुड़ी सेवाएं आमजन के दैनिक जीवन से सीधे जुड़ी हैं, ऐसे में किसी भी तरह की बाधा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सरकारी आदेश के बाद तीनों ऊर्जा निगमों के प्रबंधन ने भी अपने-अपने स्तर पर कर्मचारियों के लिए निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि एस्मा लागू रहने की अवधि में सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन अनिवार्य रूप से करना होगा।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में यूजेवीएनएल की जमीनों को निजी हाथों में सौंपने के आरोपों को लेकर डाकपत्थर क्षेत्र में आंदोलन चल रहा था। वहीं, केंद्र सरकार के निजीकरण बिल के विरोध में ऊर्जा कर्मचारियों द्वारा एक दिवसीय हड़ताल भी की जा चुकी है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने एहतियातन यह कड़ा कदम उठाया है, ताकि प्रदेश की बिजली व्यवस्था प्रभावित न हो और आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।



