देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने गेहूं और धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर होने वाली खरीद से जुड़े शुल्क में अहम बदलाव किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में गेहूं और धान की खरीद पर लगाए जाने वाले मंडी शुल्क और सेस को घटाकर कुल दो प्रतिशत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।
कैबिनेट में प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के तहत होने वाली गेहूं और धान की एमएसपी खरीद पर अब कुल दो प्रतिशत मंडी शुल्क लिया जाएगा। इससे पहले इन फसलों की खरीद पर मंडी शुल्क और सेस मिलाकर कुल ढाई प्रतिशत शुल्क लिया जाता था।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पहले लिए जाने वाले ढाई प्रतिशत शुल्क में से आधा प्रतिशत सेस की प्रतिपूर्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती थी। हालांकि करीब तीन वर्ष पहले केंद्र सरकार ने इस सेस की प्रतिपूर्ति बंद कर दी थी। इसके बाद राज्य सरकार के स्तर पर इस व्यवस्था की समीक्षा की गई और अब मंडी शुल्क एवं सेस को मिलाकर कुल दो प्रतिशत शुल्क तय किया गया है।
बताया गया कि गेहूं और धान की खरीद के दौरान यह शुल्क मुख्य रूप से आढ़तियों और राइस मिल मालिकों से लिया जाता है। सरकार के इस फैसले से खरीद प्रक्रिया को अधिक सरल और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय से जुड़े परिनियम को भी मंजूरी
कैबिनेट बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय से संबंधित परिनियम के प्रख्यापन को भी मंजूरी दी गई। इस परिनियम के माध्यम से विश्वविद्यालय से जुड़े विषयों का उपबंध और नियमन किया जाएगा।
प्रस्ताव में बताया गया कि यह मंजूरी उच्च शिक्षा विभाग के तहत उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2023 की धारा 36 के प्रावधानों के अंतर्गत दी गई है। इससे विश्वविद्यालय की प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्थाओं को स्पष्ट रूप से संचालित करने में सहायता मिलेगी।
सरकार का मानना है कि इन फैसलों से राज्य में कृषि खरीद प्रणाली और उच्च शिक्षा संस्थानों के संचालन में पारदर्शिता तथा बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सकेगा।



