उत्तराखंड में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बजट तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। राज्य के सभी विभागों ने अपने-अपने बजट प्रस्ताव वित्त विभाग को भेज दिए हैं, जिनका अब विभागवार गहन परीक्षण शुरू कर दिया गया है। आगामी बजट में विभागों को कितनी धनराशि आवंटित की जाएगी, इसका निर्धारण इस आधार पर किया जाएगा कि उन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष में स्वीकृत बजट का कितना और कैसे उपयोग किया है।
वित्त विभाग के अनुसार, बजट निर्माण में व्यय की प्रगति को प्रमुख मानक बनाया गया है। जिन विभागों ने पिछले बजट का प्रभावी और पूर्ण उपयोग किया है, उन्हें नए बजट में प्राथमिकता मिल सकती है, जबकि कम खर्च करने वाले विभागों के प्रस्तावों की कड़ी समीक्षा की जा रही है।
शुक्रवार को वित्त सचिव दिलीप जावलकर की अध्यक्षता में गृह विभाग के बजट प्रस्तावों का परीक्षण किया गया। इस दौरान वित्त विभाग और गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रस्ताव में शामिल प्रत्येक मद पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में नई योजनाओं, बुनियादी ढांचे (अवस्थापना विकास) और आवश्यक सेवाओं से जुड़े प्रावधानों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।
वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार के माध्यम से स्वीकृत योजनाओं और मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं के लिए आगामी बजट में आवश्यक प्रावधान सुनिश्चित किए जाएंगे। वित्त सचिव ने बताया कि सभी विभागों से बजट प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं और उनकी क्रमवार समीक्षा की जा रही है।
उन्होंने बताया कि शुक्रवार को गृह विभाग के प्रस्तावों की समीक्षा की गई, जबकि शनिवार को शिक्षा विभाग के बजट प्रस्तावों का परीक्षण किया जाएगा। विभागों ने विभिन्न मदों में जो धनराशि मांगी है, उसका तकनीकी और वित्तीय दृष्टि से परीक्षण करने के बाद ही उसे आम बजट में शामिल किया जाएगा।
राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बजट का अधिकतम उपयोग विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने में हो, ताकि वित्तीय अनुशासन के साथ राज्य के विकास को गति दी जा सके।



