गैरसैंण में गुलजार होगी ग्रीष्मकालीन राजधानी, सोमवार से शुरू होगा पांच दिवसीय विधानसभा बजट सत्र
देहरादून/गैरसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैंण) एक बार फिर राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनने जा रही है। सोमवार से यहां पांच दिवसीय विधानसभा का बजट सत्र शुरू होगा। इस सत्र के लिए राज्य सरकार पिछले 13 वर्षों में 11वीं बार पहाड़ का रुख करेगी। विधानसभा सत्र के चलते पूरे क्षेत्र में प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
राज्य गठन के बाद से गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग लंबे समय तक आंदोलनकारियों द्वारा उठाई जाती रही। राज्य आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों का मानना था कि गैरसैंण भौगोलिक रूप से प्रदेश के मध्य में स्थित है, इसलिए यह कुमाऊं और गढ़वाल दोनों मंडलों के लिए समान रूप से सुगम और विकास की दृष्टि से उपयुक्त राजधानी साबित हो सकती है। हालांकि बाद में सरकार ने इसे स्थायी राजधानी घोषित करने के बजाय ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा दिया।
2014 से अब तक 10 बार हो चुके हैं विधानसभा सत्र
वर्ष 2014 से अब तक गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में कुल 10 बार विधानसभा सत्र आयोजित किए जा चुके हैं। हालांकि इनमें से कई सत्र बहुत कम अवधि के रहे। आंकड़ों के अनुसार इन 10 सत्रों में से छह बार विधानसभा सत्र केवल दो से तीन दिन तक ही चला।
2018 और 2021 में सबसे लंबा चला सत्र
ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में वर्ष 2018 में विधानसभा का सत्र छह दिन तक चला था। इसके बाद वर्ष 2021 में भी एक मार्च से छह मार्च तक कुल छह दिनों का सत्र आयोजित किया गया था।
इसके अलावा वर्ष 2020 में पांच दिन, 2023 में चार दिन, 2014 में तीन दिन, 2024 में तीन दिन, 2015, 2016 और 2017 में दो-दो दिन तथा वर्ष 2025 में भी केवल दो दिन का सत्र आयोजित किया गया।
दो वर्षों में नहीं हुआ कोई सत्र
विधानसभा सचिव हेम चंद्र पंत के अनुसार वर्ष 2019 और 2022 में गैरसैंण में विधानसभा का कोई सत्र आयोजित नहीं हुआ था, जिसे शून्य सत्र के रूप में दर्ज किया गया है।
अब एक बार फिर बजट सत्र के आयोजन से गैरसैंण क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। सत्र के दौरान सरकार विभिन्न विभागों के बजट के साथ-साथ प्रदेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेगी।



