उत्तराखंड में एशियन वाटरबर्ड सेंसस पूरा, 32 आर्द्रभूमियों में 53 जलीय पक्षी प्रजातियां दर्ज

उत्तराखंड में जलीय पक्षियों की जैव विविधता को लेकर एक अहम अध्ययन सामने आया है। राज्य में एशियन वाटरबर्ड सेंसस (Asian Waterbird Census) की रिपोर्ट तैयार कर ली गई है, जिसमें प्रवासी और स्थानीय मिलाकर कुल 53 जलीय पक्षी प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई है। इस दौरान राज्यभर में कुल 18,702 जलीय पक्षियों की गणना की गई।

वन विभाग, उत्तराखंड राज्य जैव विविधता बोर्ड और ई-बर्ड इंडिया संस्था के संयुक्त सहयोग से 18 जनवरी को यह गणना अभियान चलाया गया। सर्वे के तहत आसन आर्द्रभूमि समेत राज्य की 32 प्रमुख आर्द्रभूमि स्थलों पर जलीय पक्षियों का अवलोकन और आंकलन किया गया।

परियोजना की क्षेत्रीय समन्वयक रिया जैन ने बताया कि इस सेंसस में न केवल सामान्य बल्कि 14 दुर्लभ और संकटग्रस्त जलीय पक्षी प्रजातियां भी रिकॉर्ड की गई हैं, जो राज्य की आर्द्रभूमियों के पारिस्थितिक महत्व को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि यह अध्ययन जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और भविष्य की रणनीतियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

यह संपूर्ण कार्य राज्य एशियाई जलपक्षी गणना समन्वयक एवं सेवानिवृत्त प्रमुख वन संरक्षक डॉ. धनंजय मोहन तथा वरिष्ठ प्रकृतिवादी संजय सोंधी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। सेंसस अभियान में विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों, नेचर गाइड्स और पक्षी प्रेमियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।

विशेषज्ञों का मानना है कि एशियन वाटरबर्ड सेंसस जैसी गतिविधियां न केवल पक्षी संरक्षण को मजबूती देती हैं, बल्कि आर्द्रभूमियों की स्थिति, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और जैव विविधता की निगरानी में भी अहम भूमिका निभाती हैं। उत्तराखंड की आर्द्रभूमियों में बड़ी संख्या में जलीय पक्षियों की मौजूदगी राज्य के पर्यावरणीय संतुलन के लिए एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

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