देहरादून।
केंद्र सरकार के आम बजट 2026-27 में किए गए प्रावधान उत्तराखंड के लिए विकास की नई राह खोलने वाले साबित हो सकते हैं। बायोगैस, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), ग्रीन मोबिलिटी और कार्बन कटौती से जुड़ी पहलों से न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आय में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। खास तौर पर चारधाम यात्रा के लिए प्रस्तावित ग्रीन मोबिलिटी कॉरिडोर और शहरी क्षेत्रों में ई-बस सेवाओं को इससे बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
ग्रीन मोबिलिटी कॉरिडोर का रास्ता साफ
आम बजट में कार्बन उत्सर्जन कम करने पर विशेष जोर दिया गया है, जिसका सीधा फायदा उत्तराखंड को मिलेगा। चारधाम यात्रा मार्ग पर ग्रीन मोबिलिटी कॉरिडोर विकसित करने का रास्ता अब और आसान हो गया है। बजट के तहत इलेक्ट्रिक बसों और ई-टैक्सी मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे पहाड़ी इलाकों में डीजल पर निर्भरता घटेगी और प्रदूषण में कमी आएगी।
वर्तमान में शहरी क्षेत्रों में चल रही ई-बस सेवाएं भी और मजबूत होंगी, जिससे यात्रियों को सस्ता और पर्यावरण अनुकूल परिवहन उपलब्ध होगा।
उत्तराखंड के लिए गेम चेंजर साबित होगी ईवी योजना
उत्तराखंड में पहले से ही ईवी पॉलिसी 2023 लागू है, लेकिन अब तक ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मुख्य रूप से देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी जिलों तक सीमित रहा है। बजट 2026-27 के बाद पहाड़ी क्षेत्रों में भी इलेक्ट्रिक बसें और ई-टैक्सी चलाने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
इसके साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए ईवी सर्विसिंग, मेंटेनेंस और चार्जिंग नेटवर्क के जरिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। चारधाम यात्रा में ई-वाहनों के इस्तेमाल से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को भी नई दिशा मिलेगी।
किसानों की बढ़ेगी आय, शहरों में सस्ती होगी सीएनजी
बजट में सीएनजी में कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) मिक्स करने की योजना का प्रावधान किया गया है। खास बात यह है कि सीबीजी को एक्साइज ड्यूटी से मुक्त रखा गया है, जिससे सीएनजी की कीमतों में कमी आने की संभावना है।
इसका सीधा फायदा देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, ऊधमसिंह नगर (रुद्रपुर, काशीपुर, खटीमा, सितारगंज), नैनीताल (हल्द्वानी, रामनगर) और कोटद्वार जैसे क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को मिलेगा।
वहीं दूसरी ओर, किसान अपने गोबर और कृषि अपशिष्ट से बायोगैस बनाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे। उत्तराखंड के 60 प्रतिशत से अधिक गांव पशुपालन पर निर्भर हैं। गोबर, कृषि अवशेष, जंगलों से मिलने वाला बायो-वेस्ट और आग का कारण बनने वाली चीड़ की पत्तियां बड़ी मात्रा में उपलब्ध हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर खरीद मॉडल और बायोमास आधारित माइक्रो पावर प्लांट्स किसानों के लिए आय का नया साधन बन सकते हैं।
कार्बन कैप्चर पर 20 हजार करोड़, उत्तराखंड को भी मिलेगा लाभ
केंद्र सरकार ने आम बजट 2026 में कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (CCUS) के लिए 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। हालांकि उत्तराखंड में भारी उद्योग सीमित हैं, लेकिन हरिद्वार-रुद्रपुर औद्योगिक क्लस्टर में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इस तकनीक को अपनाया जा सकता है।
इसके अलावा आईआईटी रुड़की जैसे प्रतिष्ठित संस्थान कार्बन कैप्चर तकनीक के टेस्टिंग और रिसर्च हब बन सकते हैं। इससे ग्रीन टेक्नोलॉजी में स्किल डेवलपमेंट और स्टार्टअप्स को भी बढ़ावा मिलेगा।
सौर ऊर्जा परियोजनाओं को मिलेगा नया बल
बजट में सौर ऊर्जा, वंदे भारत परियोजनाओं और क्रिटिकल मिनरल्स के लिए 29 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। उत्तराखंड में सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में पहले से सोलर प्रोजेक्ट चल रहे हैं, लेकिन अब रूफटॉप और फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स में भी नई संभावनाएं खुलेंगी।
रूफटॉप सोलर के क्षेत्र में उत्तराखंड पहले ही अपने लक्ष्य से आगे है और यह बजट राज्य को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नई गति देगा।
कुल मिलाकर, आम बजट 2026 उत्तराखंड के लिए हरित विकास, स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ परिवहन की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। बायोगैस, ईवी और सौर ऊर्जा से जुड़ी योजनाएं राज्य की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार—तीनों को मजबूती देने वाली हैं।



