नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) पर टोल या यूजर फीस का भुगतान नहीं करने वाले वाहन चालकों के लिए केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इस संबंध में ‘केंद्रीय मोटर वाहन (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026’ को अधिसूचित कर दिया है। नए नियमों के तहत यदि किसी वाहन पर राष्ट्रीय राजमार्ग पर टोल या यूजर फीस बकाया पाई जाती है, तो उससे संबंधित कई अहम सेवाओं के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी नहीं किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर यूजर फीस के पालन को सख्ती से लागू करना, इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ETC) व्यवस्था को और मजबूत बनाना तथा टोल चोरी पर प्रभावी रोक लगाना है। इसके लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
NOC किन सेवाओं के लिए रोकी जा सकेगी?
अधिसूचना के अनुसार अब राष्ट्रीय राजमार्गों पर बकाया टोल को सीधे वाहन से जुड़ी कानूनी और प्रशासनिक सेवाओं से जोड़ दिया गया है। नियमों के तहत—
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वाहन के स्वामित्व हस्तांतरण या एक राज्य से दूसरे राज्य में वाहन ट्रांसफर के लिए NOC तब तक जारी नहीं होगी, जब तक बकाया यूजर फीस का भुगतान नहीं कर दिया जाता।
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फिटनेस सर्टिफिकेट का नवीनीकरण या नया फिटनेस सर्टिफिकेट भी टोल बकाया होने पर नहीं मिलेगा।
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नेशनल परमिट के लिए आवेदन करने वाले वाणिज्यिक वाहनों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वाहन पर कोई भी अनपेड यूजर फीस शेष न हो।
यानी अब टोल बकाया का सीधा असर वाहन से जुड़े जरूरी दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रियाओं पर पड़ेगा।
MLFF लागू होने से पहले नियम क्यों सख्त किए गए?
यह अधिसूचना ऐसे समय जारी की गई है, जब देश में मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) यानी बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम को लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में है।
MLFF व्यवस्था के तहत—
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टोल प्लाजा पर कोई फिजिकल बैरियर नहीं होगा,
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वाहन बिना रुके गुजरेंगे,
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और टोल पूरी तरह डिजिटल तरीके से स्वतः कटेगा।
सरकार का मानना है कि बैरियर-फ्री सिस्टम में टोल न चुकाने की संभावना बढ़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए टोल भुगतान को NOC जैसी सेवाओं से जोड़कर अनुपालन सुनिश्चित किया जा रहा है।
किन हाईवे सेक्शनों पर MLFF का काम लगभग पूरा?
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, देश के कई अहम राष्ट्रीय राजमार्गों पर MLFF का काम अंतिम चरण में है। इनमें प्रमुख रूप से—
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दिल्ली–जयपुर हाईवे पर मनोहरपुर और शाहजहांपुर सेक्शन
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NH-48 के सूरत–वडोदरा सेक्शन पर चोरासी
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दिल्ली–चंडीगढ़ हाईवे पर घरौंदा
इन स्थानों पर जल्द ही बैरियर-फ्री टोलिंग शुरू होने की संभावना है।
‘अनपेड यूजर फीस’ का क्या अर्थ होगा?
अधिसूचना में “अनपेड यूजर फीस” की स्पष्ट परिभाषा दी गई है।
यदि—
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इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम यह दर्ज करता है कि कोई वाहन राष्ट्रीय राजमार्ग के किसी सेक्शन से गुजरा है,
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लेकिन उस वाहन से संबंधित टोल राशि सिस्टम को प्राप्त नहीं हुई है,
तो इसे अनपेड यूजर फीस माना जाएगा। यही बकाया आगे चलकर वाहन की NOC और अन्य सेवाओं से लिंक कर दी जाएगी। यह व्यवस्था राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के अनुरूप होगी।
गलती या विवाद होने पर क्या शिकायत का मौका मिलेगा?
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वाहन मालिकों को बिना अवसर दिए सीधे दंडित नहीं किया जाएगा। इसके लिए—
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जल्द ही एक ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया जाएगा,
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जहां टोल से जुड़े विवाद या गलत चार्ज की शिकायत दर्ज कराई जा सकेगी।
अधिकारियों के अनुसार, NOC रोकने जैसी कार्रवाई से पहले वाहन मालिक को बकाया निपटाने और शिकायत का समाधान कराने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
सरकार का असली उद्देश्य क्या है?
इन नए नियमों के जरिए केंद्र सरकार का लक्ष्य—
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डिजिटल टोल कलेक्शन सिस्टम को मजबूत करना,
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MLFF लागू होने के बाद टोल चोरी को रोकना,
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और यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रीय राजमार्गों का उपयोग करने वाला हर वाहन निर्धारित यूजर फीस का भुगतान करे।
सरकार का साफ संदेश है कि अब राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल भुगतान से बचना आसान नहीं होगा। बकाया टोल का असर सीधे वाहन से जुड़ी अहम सेवाओं पर पड़ेगा, जिससे नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।



