जाति जनगणना पर स्टालिन का पीएम मोदी से आग्रह: सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को किया जाए शामिल, डेटा हो सटीक और भरोसेमंद

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने आगामी जनगणना में जाति आधारित आंकड़ों को शामिल करने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अहम आग्रह किया है। उन्होंने कहा है कि जाति जनगणना जैसे संवेदनशील विषय पर निर्णय लेते समय सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को शामिल करते हुए एक व्यापक और परामर्शी तंत्र बनाया जाना चाहिए, ताकि एकत्र किया गया डेटा स्पष्ट, समावेशी और पूरी तरह भरोसेमंद हो सके।

मुख्यमंत्री स्टालिन ने शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में कहा कि जाति जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर सामाजिक न्याय, शिक्षा, रोजगार, आरक्षण और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ता है। ऐसे में यदि यह प्रक्रिया पूरी सावधानी और पारदर्शिता के साथ नहीं अपनाई गई, तो इससे गलत आंकड़े, अनावश्यक विवाद और सामाजिक विभाजन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

तमिलनाडु में इस वर्ष प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले जातिगत जनगणना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री स्टालिन का यह पत्र काफी अहम माना जा रहा है। उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि जातियों से जुड़े प्रश्न, उनके वर्ग और उपवर्ग, तथा आंकड़े एकत्र करने की पद्धति पूरी तरह स्पष्ट होनी चाहिए और उसमें किसी भी प्रकार की अस्पष्टता नहीं होनी चाहिए।

केंद्र को राज्यों से परामर्श लेने की जरूरत: स्टालिन

मुख्यमंत्री स्टालिन ने इस बात पर जोर दिया कि भले ही जनगणना कराना केंद्र सरकार का संवैधानिक दायित्व है, लेकिन इसके परिणामों का प्रभाव सीधे-सीधे राज्यों की नीतियों और योजनाओं पर पड़ता है। ऐसे में केंद्र सरकार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से व्यापक परामर्श करना चाहिए। इससे विभिन्न राज्यों की सामाजिक और क्षेत्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सही और संतुलित निर्णय लिया जा सकेगा, साथ ही देश की संघीय व्यवस्था भी मजबूत होगी।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जाति जनगणना की प्रक्रिया से पहले पायलट परीक्षण जैसी सावधानियां अपनाई जानी चाहिए, ताकि डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके। स्टालिन ने कहा कि सही तरीके से की गई जाति जनगणना सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकती है।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ऐतिहासिक अवसर

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह एक ऐतिहासिक अवसर बन सकता है, जिससे भारत की समानता, समावेशिता और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर सभी हितधारकों को साथ लेकर आगे बढ़ेगी।

तमिलनाडु की पुरानी मांग है जाति जनगणना

गौरतलब है कि तमिलनाडु लंबे समय से जाति आधारित जनगणना की मांग करता रहा है। राज्य विधानसभा ने भी पूर्व में इस संबंध में केंद्र सरकार से आग्रह करते हुए प्रस्ताव पारित किया था। मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि जाति विवरण को जनगणना में शामिल करना साक्ष्य आधारित नीति निर्माण और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, यह निर्णय न केवल तमिलनाडु बल्कि पूरे देश में न्यायसंगत और समावेशी विकास की नींव को मजबूत करेगा।

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