हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर भ्रम, बिजली बोर्ड ने किया खंडन
हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट बिजली मीटरों को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार सवाल और आशंकाएं सामने आ रही हैं। इन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए राज्य बिजली बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर लगाने से न तो बिजली के बिलों पर कोई अतिरिक्त असर पड़ेगा और न ही 125 यूनिट तक मिलने वाली मुफ्त बिजली (सब्सिडी) की सुविधा में कोई बदलाव किया जाएगा।
बुधवार को राज्य बिजली बोर्ड के प्रवक्ता की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि स्मार्ट मीटर केवल बिजली खपत को मापने का एक आधुनिक उपकरण है, इसका बिजली दरों (टैरिफ) या बिलिंग नीति से कोई सीधा संबंध नहीं है।
मीटर की रीडिंग पर संदेह हो तो दूसरा मीटर लगवाने की सुविधा
बिजली बोर्ड ने बताया कि यदि किसी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर की रीडिंग पर संदेह है, तो प्रदेश सरकार ने मौजूदा मीटर के साथ दूसरा स्मार्ट मीटर लगाने की अनुमति दी है। इससे उपभोक्ता अपनी बिजली खपत का मिलान स्वयं कर सकता है।
प्रवक्ता के अनुसार, स्मार्ट मीटर के जरिए उपभोक्ता हर 15 मिनट में अपनी बिजली खपत की जानकारी देख सकता है। यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है, तो उपभोक्ता अपने संबंधित विद्युत उप-मंडल कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकता है, जहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना पर कोई असर नहीं
राज्य बिजली बोर्ड ने साफ किया कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने से बिजली सब्सिडी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। प्रदेश में 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की योजना पहले की तरह जारी रहेगी। स्मार्ट मीटर के कारण बिजली बिलों में किसी भी तरह की स्वतः बढ़ोतरी नहीं होगी।
प्रवक्ता ने जानकारी दी कि प्रदेश में अब तक करीब 7.5 लाख स्मार्ट बिजली मीटर लगाए जा चुके हैं और आगे भी यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी।
सोशल मीडिया पर फैल रहे भ्रम पर चेतावनी
बिजली बोर्ड ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को भ्रामक बताते हुए कहा कि स्मार्ट मीटर का उद्देश्य केवल वास्तविक बिजली खपत को सही तरीके से मापना है। पुराने मीटरों में कई बार मासिक औसत रीडिंग के आधार पर बिल जारी कर दिए जाते थे, चाहे उपभोक्ता ने बिजली का उपयोग किया हो या नहीं।
इसके विपरीत, स्मार्ट मीटर में वास्तविक खपत के आधार पर ही बिल तैयार होता है। यदि किसी उपभोक्ता ने बिजली का उपयोग नहीं किया है, तो उसे औसत बिल नहीं दिया जाएगा।
रियल-टाइम डाटा से होगी पारदर्शिता और बेहतर सेवा
प्रवक्ता ने बताया कि स्मार्ट मीटर से बिजली खपत का डाटा स्वतः एक केंद्रीय डाटा सेंटर तक पहुंच जाता है, जिससे बिलिंग में पारदर्शिता आएगी और उपभोक्ताओं को बेहतर ऑनलाइन सेवाएं मिल सकेंगी। यह बदलाव मैनुअल और अनुमान आधारित बिलिंग प्रणाली से हटकर रियल-टाइम डाटा आधारित व्यवस्था की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटरों का मुख्य उद्देश्य व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, उपभोक्ताओं को सुविधाजनक सेवाएं देना और बिजली वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना है।
अफवाहों से दूर रहने की अपील
अंत में बिजली बोर्ड ने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे स्मार्ट मीटर को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों पर भरोसा न करें और केवल प्रमाणिक व आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें। बोर्ड ने भरोसा दिलाया कि उपभोक्ताओं के हितों की पूरी तरह से रक्षा की जाएगी और किसी भी समस्या का समाधान नियमानुसार किया जाएगा।



