शंकराचार्य से हुई कथित बदसलूकी पर भड़की चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत, उच्चस्तरीय जांच की उठी मांग

प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के साथ हुई घटना को लेकर चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत में भारी आक्रोश देखने को मिला है। महापंचायत ने इस पूरे प्रकरण की कड़ी निंदा करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की है।

जानकारी के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज संगम क्षेत्र के संगम नोज के सामने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज का रथ रोके जाने को लेकर समर्थकों और पुलिस के बीच धक्कामुक्की हो गई। स्थिति बिगड़ने के बाद शंकराचार्य संगम स्नान किए बिना ही वापस लौट गए। इस घटना से साधु-संत समाज और तीर्थ पुरोहितों में रोष व्याप्त है।

चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा कि माघ मेले जैसे पवित्र आयोजन के दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य एवं अन्य साधु-संतों के साथ पुलिस व प्रशासन द्वारा किया गया व्यवहार अत्यंत अशोभनीय और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के उच्च पद पर आसीन धर्माचार्य के साथ इस प्रकार की घटना स्वीकार्य नहीं है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

यमुनोत्री मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल ने इस घटना को सनातन धर्म पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा कि साधु-संतों और धर्माचार्यों का सम्मान करना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन यहां इसके विपरीत दृश्य देखने को मिला।

वहीं ब्रह्म कपाल तीर्थ पुरोहित पंचायत समिति के केंद्रीय अध्यक्ष उमेश सती ने कहा कि यह प्रकरण सनातन परंपरा का अपमान है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों व कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

केदार सभा के सदस्य एवं चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के उपाध्यक्ष संतोष त्रिवेदी ने भी घटना की निंदा करते हुए कहा कि यह सनातन धर्म और उसकी परंपराओं पर हमला है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो साधु-संत समाज आंदोलन के लिए मजबूर हो सकता है।

चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने एक स्वर में प्रशासन से मांग की है कि इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए धर्माचार्यों की गरिमा और सम्मान की रक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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