नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को खनन मंत्रालय की तिमाही समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए दुर्लभ खनिजों (रेयर मिनरल्स) को लेकर सरकार की रणनीति की व्यापक समीक्षा की। बैठक में विदेशों में दुर्लभ खनिज संपत्तियों के अधिग्रहण, देश के भीतर पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) को बढ़ावा देने वाली योजनाओं और सुरक्षित सप्लाई चेन के निर्माण पर विशेष चर्चा की गई। सरकार का मुख्य उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना, आत्मनिर्भरता बढ़ाना और ग्रीन एनर्जी को मजबूत आधार प्रदान करना है।
प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य की औद्योगिक और तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दुर्लभ खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि दुर्लभ खनिजों की सुरक्षित और निरंतर आपूर्ति भारत की आर्थिक मजबूती, रणनीतिक हितों और तकनीकी विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। बैठक में सप्लाई चेन की मजबूती और दीर्घकालिक योजना पर भी जोर दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि विदेशों में दुर्लभ खनिज संपत्तियों का अधिग्रहण भारत के दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों से जुड़ा हुआ है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और रक्षा जैसे क्षेत्रों में इन खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में स्थिर और भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाना जरूरी है, ताकि घरेलू उद्योगों को मजबूती मिले और आयात पर निर्भरता घटे।
दुर्लभ पृथ्वी तत्वों पर विशेष चर्चा
बैठक के दौरान दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (रेयर अर्थ एलिमेंट्स) की उपलब्धता और भविष्य की संभावनाओं पर भी विस्तार से मंथन किया गया। अधिकारियों के अनुसार यह चर्चा काफी उपयोगी रही। इन खनिजों को भारत की ग्रीन एनर्जी योजनाओं, आधुनिक तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा आधारित उद्योगों के लिए अहम माना जा रहा है। सरकार वैकल्पिक स्रोतों की खोज और सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।
रीसाइक्लिंग योजना से बड़े फायदे की उम्मीद
प्रधानमंत्री ने 1,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन आधारित रीसाइक्लिंग योजना के प्रदर्शन की भी समीक्षा की। इस योजना का उद्देश्य देश में दुर्लभ खनिजों की पुनर्चक्रण क्षमता विकसित करना है। अनुमान है कि इससे हर साल करीब 270 किलो टन रीसाइक्लिंग क्षमता तैयार होगी, जिसके जरिए लगभग 40 किलो टन दुर्लभ खनिज का उत्पादन संभव होगा। इस योजना से करीब 8,000 करोड़ रुपये का निवेश आने और लगभग 70,000 लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना जताई गई है।
राष्ट्रीय दुर्लभ खनिज मिशन के लक्ष्य
यह पूरी पहल राष्ट्रीय दुर्लभ खनिज मिशन का हिस्सा है। सरकार ने इस मिशन के लिए कुल 34,300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिसमें 16,300 करोड़ रुपये का केंद्रीय सहयोग शामिल है। सात वर्षों की अवधि वाले इस मिशन का लक्ष्य आत्मनिर्भरता हासिल करना, सप्लाई चेन को मजबूत बनाना और भारत की ग्रीन एनर्जी यात्रा को तेज करना है। तांबा, लिथियम, निकल, कोबाल्ट और रेयर अर्थ जैसे प्रमुख खनिज इस मिशन के केंद्र में हैं।
सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से भारत न केवल अपनी औद्योगिक जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक भरोसेमंद और मजबूत सप्लाई चेन पार्टनर के रूप में उभरेगा।



