पिथौरागढ़: सिक्किम में हिमस्खलन की चपेट में आकर शहीद हुए लांस नायक विकास कुमार, पैतृक गांव में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

पिथौरागढ़: सिक्किम से पहुंचा शहीद का पार्थिव शरीर, सैन्य सम्मान के साथ हुई अंत्येष्टि

पिथौरागढ़ जिले के सुकौली निवासी भारतीय सेना के जवान लांस नायक विकास कुमार, जो सिक्किम में ड्यूटी के दौरान हिमस्खलन की चपेट में आकर शहीद हो गए थे, उनका पार्थिव शरीर शुक्रवार को उनके पैतृक गांव पहुंचा। तिरंगे में लिपटा शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया, जबकि अंतिम यात्रा में शामिल लोगों की आंखें भी नम हो उठीं। बाद में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

जानकारी के अनुसार सुकौली निवासी लांस नायक विकास कुमार 19 कुमाऊं रेजिमेंट में तैनात थे। 31 मार्च को सिक्किम में ड्यूटी के दौरान अचानक आए हिमस्खलन की चपेट में आने से वे शहीद हो गए थे। शुक्रवार को सेना के जवानों द्वारा उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लपेटकर उनके पैतृक गांव लाया गया।

तिरंगे में लिपटे बेटे का पार्थिव शरीर देखते ही पिता गणेश राम और माता मंजू देवी बेसुध हो गए। पूरे गांव में मातम पसरा रहा। शहीद को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में लोग उनके घर पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस दौरान जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई, पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रह्लाद कोंडे, मेयर कल्पना देवलाल, एसडीएम जितेंद्र वर्मा, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी करम चंद सहित पूर्व सैनिक संगठन और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने शहीद को श्रद्धांजलि दी।

इसके बाद शहीद की अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें जनसैलाब उमड़ पड़ा। “विकास अमर रहे” के जयघोष के बीच अंतिम यात्रा रामेश्वर घाट पहुंची, जहां सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। ताऊ के पुत्र बसंत प्रसाद ने उन्हें मुखाग्नि दी। कुमाऊं रेजिमेंट के जवानों ने मेजर श्रवण कुमार के नेतृत्व में शहीद को अंतिम सलामी दी।

पत्नी का विलाप सुनकर हर आंख हुई नम

जब शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो माहौल बेहद भावुक हो गया। शहीद की 21 वर्षीय पत्नी प्रीति को जब पति के पार्थिव शरीर के पास लाया गया तो वह इस सच को स्वीकार नहीं कर पा रही थीं। रोते-बिलखते हुए वह बार-बार यही कहती रहीं कि “इन्हें अस्पताल ले चलो, ये ठीक हो जाएंगे।” पत्नी की यह दर्दभरी पुकार सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।

इस दौरान आठ महीने के मासूम बेटे को भी पिता के पार्थिव शरीर के पास लाया गया। बताया गया कि पत्नी की तबीयत को देखते हुए उन्हें पहले केवल इतना बताया गया था कि विकास बीमार हैं और उन्हें घर लाया जा रहा है।

भाई ने शहीद के नाम पर सड़क का नाम रखने की उठाई मांग

शहीद के बड़े भाई नीरज कुमार ने नम आंखों से कहा कि उन्हें अपने भाई पर गर्व है, जिसने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि विकास हमेशा देश सेवा के लिए समर्पित रहे और अंत तक अपना कर्तव्य निभाते रहे।

नीरज कुमार ने प्रशासन से मांग की कि सुकौली से गणकोट जाने वाली सड़क का सुधारीकरण कर उसे शहीद विकास कुमार के नाम से पहचाना जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी उनके बलिदान को याद रख सकें।

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