लाल किला कार बम धमाका: डॉ. शाहीन सईद समेत पांच आरोपी तीन दिन की NIA हिरासत में, विदेशी कनेक्शन और फंडिंग की गहन जांच

नई दिल्ली।
लाल किला के पास हुए भीषण कार बम धमाके के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को बड़ी सफलता मिली है। पटियाला हाउस कोर्ट ने इस मामले में डॉ. शाहीन सईद सहित पांच आरोपियों को तीन दिन की एनआईए हिरासत में भेजने के आदेश दिए हैं। एजेंसी इन आरोपियों से धमाके की साजिश, फंडिंग के स्रोत, विदेशी हैंडलरों से संपर्क और तकनीकी सहायता से जुड़े अहम पहलुओं पर गहन पूछताछ करेगी।

एनआईए की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जांच अभी निर्णायक चरण में है और कई अहम कड़ियां सुलझनी बाकी हैं। एजेंसी ने दलील दी कि आरोपियों की हिरासत जरूरी है, ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके और यह पता लगाया जा सके कि इस आतंकी साजिश के पीछे कौन-कौन लोग और संगठन सक्रिय थे। कोर्ट ने एनआईए की दलीलों को स्वीकार करते हुए तीन दिन की हिरासत मंजूर कर ली।

इस मामले में जिन आरोपियों को एनआईए की हिरासत में भेजा गया है, उनमें डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद, जसिर बिलाल वानी उर्फ दानिश, डॉ. अदील अहमद और डॉ. मुजम्मिल शकील शामिल हैं। कोर्ट के आदेश के अनुसार, इन सभी आरोपियों को 16 जनवरी 2026 को दोबारा अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। इससे पहले डॉ. शाहीन सईद को पिछले महीने न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

एनआईए ने कोर्ट को यह भी बताया कि जांच के दौरान यह संकेत मिले हैं कि धमाके की साजिश केवल स्थानीय स्तर पर नहीं रची गई थी, बल्कि इसके तार विदेशी हैंडलरों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि फंडिंग कहां से आई, विस्फोटक और तकनीकी सहायता कैसे उपलब्ध कराई गई और किन माध्यमों से आरोपियों के बीच संपर्क बना रहा।

गौरतलब है कि यह मामला 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास खड़ी एक कार में हुए भीषण धमाके से जुड़ा है। इस विस्फोट में 13 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। शुरुआती जांच में सामने आया था कि यह हमला पूरी तरह सुनियोजित था और इसका मकसद बड़े पैमाने पर दहशत फैलाना था।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर रह चुके डॉ. उमर उन नबी इस साजिश में अहम भूमिका निभा रहे थे। बताया गया कि धमाके के समय डॉ. उमर कार में मौजूद थे और विस्फोट में उनकी मौत हो गई थी। एनआईए अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि डॉ. उमर के संपर्क किन-किन लोगों से थे और उन्होंने इस साजिश को अंजाम देने में किस तरह की भूमिका निभाई।

एनआईए अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले दिनों में पूछताछ के दौरान कई बड़े खुलासे होने की संभावना है, जिससे इस आतंकी हमले के पीछे के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है।

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