नई दिल्ली/तेहरान।
ईरान में लगातार गहराते राजनीतिक और सामाजिक संकट के बीच भारत की भूमिका एक बार फिर अहम होती नजर आ रही है। देश में जारी हिंसक प्रदर्शनों, आगजनी और बढ़ते अमेरिकी दबाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत की जानकारी खुद विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की।
ईरान इस समय गंभीर आंतरिक उथल-पुथल से गुजर रहा है। पिछले दो हफ्तों से अधिक समय से देशभर में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हैं। सड़कों पर उतरी जनता सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ खुलकर नारेबाजी कर रही है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है। इसी बीच अमेरिका की ओर से संभावित सैन्य हस्तक्षेप को लेकर चेतावनियां भी दी गई हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।
जयशंकर-अराघची बातचीत में क्या हुआ?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने एक्स पोस्ट में बताया कि उन्हें ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का फोन आया। दोनों नेताओं के बीच ईरान और उसके आसपास तेजी से बदलती स्थिति पर चर्चा हुई। हालांकि बातचीत का विस्तृत ब्योरा साझा नहीं किया गया, लेकिन कूटनीतिक हलकों में इस संपर्क को ईरान की बिगड़ती स्थिति और अंतरराष्ट्रीय समर्थन की तलाश से जोड़कर देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत, पश्चिम एशिया में एक संतुलित और भरोसेमंद साझेदार के रूप में ईरान के लिए अहम है। ऐसे में यह फोन कॉल क्षेत्रीय स्थिरता और संभावित संकट प्रबंधन के प्रयासों का संकेत भी माना जा रहा है।
ईरान में हालात बेहद गंभीर
ईरान में पिछले दो हफ्तों से अधिक समय से हिंसक विरोध प्रदर्शन जारी हैं। कई शहरों में आगजनी, झड़पें और कर्फ्यू जैसे हालात बने हुए हैं। सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई के चलते अब तक कम से कम 2,571 लोगों की मौत की खबर है। यह आंकड़ा हाल के दशकों में ईरान के किसी भी आंदोलन से कहीं अधिक बताया जा रहा है और 1979 की इस्लामी क्रांति के दौर की याद दिलाता है।
भारत ने जारी की एडवाइजरी
ईरान में बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत सरकार ने वहां मौजूद भारतीय नागरिकों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने ईरान में रह रहे भारतीयों—छात्रों, तीर्थयात्रियों, व्यापारियों और पर्यटकों—को सलाह दी है कि वे वाणिज्यिक उड़ानों सहित उपलब्ध किसी भी परिवहन साधन का उपयोग कर जल्द से जल्द देश छोड़ दें। साथ ही संवेदनशील इलाकों से दूर रहने और पूरी सतर्कता बरतने की भी अपील की गई है।
जयशंकर की आईओआरए महासचिव से मुलाकात
इस बीच, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को नई दिल्ली में हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA) के महासचिव संजीव रंजन से भी मुलाकात की। बैठक में IORA के सदस्य देशों के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों की समीक्षा की गई। सरकारों, उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के बीच आपसी तालमेल मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि बैठक का उद्देश्य संगठन के ढांचे के भीतर सहयोग को आगे बढ़ाना और हिंद महासागर क्षेत्र में टिकाऊ एवं समावेशी विकास को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि बेहतर क्षेत्रीय समन्वय से न सिर्फ आर्थिक संभावनाएं खुलेंगी, बल्कि स्थिरता और सुरक्षा भी मजबूत होगी।
कूटनीतिक नजरें भारत पर
ईरान संकट के बीच भारत से हुई यह बातचीत बताती है कि वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर भारत की कूटनीतिक भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि भारत इस संवेदनशील हालात में किस तरह संतुलन बनाकर अपनी विदेश नीति को आगे बढ़ाता है।



