भारत–यूएई संबंधों को नई गति: पीएम मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद के बीच द्विपक्षीय वार्ता, रक्षा, ऊर्जा और एआई सहित कई क्षेत्रों में सहयोग पर सहमति

भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में सोमवार को एक अहम कदम उठाया गया। यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ लोक कल्याण मार्ग स्थित उनके निवास पर विस्तृत द्विपक्षीय बैठक हुई। इस दौरान दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए और रक्षा, ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष, व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक सहयोग सहित अनेक क्षेत्रों में साझेदारी को नई रफ्तार देने पर सहमति जताई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति शेख मोहम्मद का गर्मजोशी से स्वागत किया और भारत-यूएई के बीच बीते एक दशक में मजबूत हुए रिश्तों को “व्यापक रणनीतिक साझेदारी का आदर्श उदाहरण” बताया। बैठक के दौरान क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी गहन विचार-विमर्श हुआ।

समुद्री धरोहर और ध्रुवीय विज्ञान में सहयोग

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बैठक की जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई की उस पहल की सराहना की, जिसके तहत राष्ट्रीय समुद्री धरोहर परिसर के लिए ऐतिहासिक कलाकृतियां गुजरात के लोटल में प्रदान की जाएंगी। इसके साथ ही दोनों देशों ने ध्रुवीय विज्ञान, संयुक्त अभियानों और संस्थागत सहयोग जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने का निर्णय लिया।

प्रवासी भारतीयों की भूमिका पर चर्चा

बैठक में यूएई में रह रहे लगभग 45 लाख भारतीय मूल के नागरिकों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति शेख मोहम्मद को भारतीय समुदाय की भलाई और हितों की सुरक्षा के लिए धन्यवाद दिया। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के प्रयासों का समर्थन किया।

इन प्रमुख क्षेत्रों में बनी सहमति

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच हुई वार्ता में निम्नलिखित अहम फैसले लिए गए—

  • भारत-यूएई के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 2032 तक 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय।

  • रणनीतिक रक्षा साझेदारी को मजबूत करने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट पर सहमति।

  • ऊर्जा सहयोग के तहत यूएई द्वारा भारत को प्रतिवर्ष 5 लाख मीट्रिक टन एलएनजी की आपूर्ति।

  • यूएई भारत का दूसरा सबसे बड़ा एलएनजी आपूर्तिकर्ता बना रहेगा।

  • परमाणु ऊर्जा में सहयोग, बड़े रिएक्टरों और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टरों के विकास पर सहमति।

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को प्राथमिकता, भारत में सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित होगा।

  • भारत में डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने के लिए यूएई निवेश करेगा।

  • अंतरिक्ष क्षेत्र में संयुक्त सहयोग—लॉन्च पैड, सैटेलाइट निर्माण और साझा मिशन।

  • गुजरात के धोलेरा में विशेष निवेश क्षेत्र विकसित करने पर समझौता।

  • धोलेरा में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, पोर्ट, स्मार्ट सिटी और रेल-ऊर्जा परियोजनाओं का विकास।

  • खाद्य सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर, जिससे भारतीय किसानों को लाभ होगा।

  • डेटा एम्बेसी की स्थापना की संभावना पर विचार।

  • सीमा पार आतंकवाद की कड़ी निंदा।

  • यमन, गाजा और ईरान की स्थिति पर चर्चा।

  • यूएई द्वारा ब्रिक्स में भारत की अध्यक्षता को समर्थन।

व्यापार और निवेश को बढ़ावा

विदेश सचिव ने बताया कि व्यापार और निवेश के क्षेत्र में भारत मार्ट, वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर और भारत–अफ्रीका एसईटीयू जैसी पहलों को तेज करने पर सहमति बनी। यूएई की प्रमुख कंपनियों डीपी वर्ल्ड और फर्स्ट अबू धाबी बैंक को गुजरात की गिफ्ट सिटी में अपने कार्यालय और संचालन शुरू करने की अनुमति दी गई है। साथ ही राष्ट्रीय भुगतान प्लेटफॉर्म के इंटरकनेक्शन पर भी काम करने का निर्णय लिया गया।

द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा

बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-यूएई सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की। उन्होंने हाल के वर्षों में हुए उच्चस्तरीय दौरों का स्वागत करते हुए कहा कि इनसे दोनों देशों के रिश्तों में पीढ़ीगत निरंतरता दिखाई देती है। विशेष रूप से अबू धाबी और दुबई के क्राउन प्रिंसेज के भारत दौरे का उल्लेख किया गया।

अबू धाबी में ‘हाउस ऑफ इंडिया’ की स्थापना

एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पहल के तहत अबू धाबी में ‘हाउस ऑफ इंडिया’ स्थापित करने का निर्णय लिया गया। यह आधुनिक संग्रहालय और सांस्कृतिक केंद्र भारत की प्राचीन विरासत और भारत-यूएई साझेदारी का प्रतीक होगा।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि 2022 में हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के बाद भारत-यूएई व्यापार 100 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। दोनों नेताओं ने इसे 2032 तक 200 अरब डॉलर तक ले जाने का संकल्प दोहराया। इसके साथ ही एमएसएमई निर्यात को पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरेशिया तक बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

कुल मिलाकर, यह बैठक भारत-यूएई संबंधों को रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला अहम कदम मानी जा रही है।

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