Haridwar News: रानीपुर विधायक आदेश चौहान को बड़ी राहत, सीबीआई कोर्ट के फैसले को जिला अदालत ने किया निरस्त; प्रताड़ना मामले में बरी

रानीपुर विधायक आदेश चौहान को बड़ी राहत, जिला अदालत ने किया दोषमुक्त

हरिद्वार जिले के रानीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक आदेश चौहान को लंबे समय से चल रहे एक मामले में बड़ी राहत मिली है। देहरादून की अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत ने सीबीआई कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को निरस्त करते हुए विधायक आदेश चौहान समेत अन्य आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्पेशल कोर्ट का पूर्व आदेश त्रुटिपूर्ण था।

इस फैसले के बाद न केवल विधायक आदेश चौहान बल्कि इस मामले में सह-अभियुक्त बनाए गए उनकी भांजी दीपिका और पुलिस अधिकारियों को भी राहत मिली है।

भांजी की ससुराल में प्रताड़ना का था मामला

मामले की शुरुआत वर्ष 2009 में हुई थी। जानकारी के अनुसार, विधायक आदेश चौहान की भांजी दीपिका का विवाह रुड़की निवासी मनीष के साथ हुआ था। दीपिका ने 11 जुलाई 2009 को गंगनहर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि ससुराल पक्ष द्वारा उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ससुराल पक्ष के लोगों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया था। इसी दौरान इंस्पेक्टर आरके चमोली पर आरोप लगा कि उन्होंने आरोपियों को अवैध रूप से हिरासत में रखा और उनके साथ मारपीट की। इसके बाद 13 जुलाई 2009 को कई धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए आरोपियों के खिलाफ चालान भी पेश किया गया।

दीपिका ने अपने ससुर धीर सिंह, सास, ननद और पति मनीष पर गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि बाद में ससुराल पक्ष के आरोपियों को अदालत से जमानत मिल गई थी।

ससुर ने विधायक पर लगाया था षड्यंत्र का आरोप

घटना के लगभग 17 दिन बाद, 27 जुलाई 2009 को दीपिका के ससुर धीर सिंह ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए विधायक आदेश चौहान पर षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विधायक ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए तत्कालीन एसएचओ आरके चमोली, एसआई दिनेश, एसआई राजेंद्र सिंह रौतेला और दीपिका के साथ मिलकर उन्हें और उनके परिवार को अवैध रूप से हिरासत में रखवाया और प्रताड़ित कराया।

सीबीआई जांच के बाद दर्ज हुआ आरोप पत्र

इस मामले की प्रारंभिक जांच सिविल पुलिस द्वारा की गई थी, जिसके बाद अंतिम रिपोर्ट पेश की गई। बाद में मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई। सीबीआई ने जांच के बाद तत्कालीन एसएचओ, दो एसआई, विधायक आदेश चौहान और दीपिका समेत अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया।

स्पेशल सीबीआई मजिस्ट्रेट की अदालत ने इस मामले में कुल 51 गवाहों के बयान दर्ज किए थे। इसके बाद 26 मई 2025 को अदालत ने विधायक आदेश चौहान समेत अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए अधिकतम छह माह के कारावास और एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।

जिला अदालत ने स्पेशल कोर्ट का फैसला किया निरस्त

स्पेशल कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ विधायक आदेश चौहान ने जिला एवं सत्र न्यायालय देहरादून में अपील दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष विस्तृत बहस और साक्ष्य प्रस्तुत किए।

अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम महेश कोशिबा ने मामले की सुनवाई के बाद पाया कि स्पेशल कोर्ट के आदेश में कई त्रुटियां हैं। इसके बाद अदालत ने पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए विधायक आदेश चौहान सहित सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

इस फैसले के बाद लंबे समय से चल रहे इस मामले में सभी आरोपियों को बड़ी राहत मिली है।

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