Haldwani: बेटी के फैसले से आहत माता-पिता ने छोड़ा शहर, सामाजिक तानों से परेशान होकर गांव लौटने का लिया निर्णय

हल्द्वानी: शहर के मुखानी क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने एक परिवार को सामाजिक दबाव और लोकलाज के चलते अपना घर-बार छोड़ने पर मजबूर कर दिया। 19 वर्षीय युवती के एक दर्जी के साथ घर से चले जाने और बाद में थाने में परिजनों के साथ बदसलूकी की घटना से आहत माता-पिता ने हल्द्वानी छोड़कर अपने गांव जाने का फैसला कर लिया है।

जानकारी के अनुसार मुखानी क्षेत्र की एक कॉलोनी में रहने वाली 19 वर्षीय युवती 26 फरवरी को इंटर कॉलेज जाने के लिए घर से निकली थी, लेकिन उसके बाद वह घर नहीं लौटी। उसी समय से पास में किराये की दुकान चलाने वाला दर्जी भी अपनी दुकान बंद कर कहीं चला गया। युवती के अचानक लापता होने से परिजन चिंतित हो गए और उन्होंने दर्जी पर बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी।

बताया जा रहा है कि करीब तीन साल पहले उक्त दर्जी ने अमरावती कॉलोनी में सिलाई की दुकान किराये पर ली थी। इसी दौरान युवती सिलाई सीखने के बहाने उसकी दुकान पर जाने लगी थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और 26 फरवरी को युवती घर से निकलने के बाद वापस नहीं लौटी।

संगठनों के दबाव पर दर्ज हुई प्राथमिकी

परिजनों की शिकायत के बावजूद शुरुआती दौर में मामला दर्ज नहीं किया गया। बाद में विभिन्न संगठनों के दबाव के चलते मुखानी पुलिस ने करीब एक महीने बाद 24 मार्च को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और तीन दिन के भीतर युवती और दर्जी दोनों को ढूंढ़ निकाला।

चौकी में माता-पिता के साथ बदसलूकी

जब पुलिस दोनों को लेकर आरटीओ चौकी पहुंची तो वहां स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। बताया गया कि युवती ने दर्जी के साथ ही रहने की जिद करते हुए अपनी मां को थप्पड़ मार दिया और पिता के साथ भी अभद्र व्यवहार किया। इस घटना से माता-पिता गहरे आहत और शर्मसार हो गए।

सामाजिक तानों से परेशान होकर लिया बड़ा फैसला

पीड़ित पिता, जो शहर में सब्जी का ठेला लगाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे, ने बताया कि घटना के बाद समाज में उन्हें लगातार ताने सुनने पड़ रहे थे। लोगों की बातें और सामाजिक दबाव उनके लिए सहन करना मुश्किल हो गया था।

इसी कारण उन्होंने अपनी पत्नी के साथ हल्द्वानी छोड़ने का फैसला कर लिया और बरेली स्थित अपने गांव लौट गए। उनका कहना है कि अब गांव में रहकर ही नया जीवन शुरू करने की कोशिश करेंगे।

यह घटना न केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी को दर्शाती है, बल्कि समाज में मौजूद सामाजिक दबाव और लोकलाज की भावना को भी उजागर करती है, जो कई बार लोगों को अपने ही शहर और जीवन को छोड़ने पर मजबूर कर देती है।

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