अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में शांति बहाली और पुनर्निर्माण के लिए बनाई गई वैश्विक पहल में भारत को अहम भूमिका निभाने का न्योता दिया है। ट्रंप ने भारत को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का प्रस्ताव भेजा है, जो गाजा में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने, स्थिरता स्थापित करने और दीर्घकालिक विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गठित किया गया है। यह बोर्ड ट्रंप की गाजा के लिए प्रस्तावित 20-सूत्रीय शांति योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका अब इस योजना के दूसरे चरण को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में भारत को दिया गया यह निमंत्रण उसकी वैश्विक साख, संतुलित विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयासों में सक्रिय भूमिका को दर्शाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भारत इस पहल में शामिल होता है, तो पश्चिम एशिया में शांति प्रक्रिया में उसकी कूटनीतिक स्थिति और मजबूत हो सकती है।
फिलहाल इस प्रस्ताव पर भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, माना जा रहा है कि बोर्ड में शामिल देश गाजा की मौजूदा स्थिति पर करीबी नजर रखेंगे और मानवीय सहायता, पुनर्निर्माण, निवेश तथा संघर्षविराम से जुड़े कदमों पर सामूहिक रूप से निर्णय लेंगे।
क्या है ‘बोर्ड ऑफ पीस’?
व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के सदस्यों की सूची जारी की है। यह बोर्ड गाजा में शांति, स्थिरता, पुनर्निर्माण और दीर्घकालिक विकास की निगरानी करेगा। बोर्ड के चेयरमैन स्वयं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होंगे।
व्हाइट हाउस के अनुसार, इस बोर्ड में कई प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय हस्तियों को शामिल किया गया है, जिनमें—
-
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो
-
ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर
-
ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ
-
वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा
-
ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर
-
अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के सीईओ मार्क रोवन
-
अमेरिका के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गेब्रियल
इसके अलावा, तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान और कतर के राजनयिक अली अल थवाड़ी को भी गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड में शामिल किया गया है।
बोर्ड की क्या होंगी जिम्मेदारियां?
व्हाइट हाउस के मुताबिक, बोर्ड के सदस्य गाजा से जुड़े कई अहम क्षेत्रों में काम करेंगे। इनमें प्रशासन और शासन व्यवस्था को मजबूत करना, क्षेत्रीय देशों के साथ रिश्ते सुधारना, गाजा का पुनर्निर्माण, निवेश आकर्षित करना, बड़े पैमाने पर फंडिंग और पूंजी जुटाना शामिल है। इसके साथ ही मानवीय सहायता को प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर भी जोर दिया जाएगा।
एक अरब डॉलर शुल्क को लेकर विवाद
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए देशों को एक अरब अमेरिकी डॉलर का भुगतान करना पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बोर्ड के सदस्यों का कार्यकाल अधिकतम तीन वर्ष का होगा और सदस्यता के नवीनीकरण का फैसला अध्यक्ष पर निर्भर करेगा।
हालांकि, व्हाइट हाउस ने इन दावों को भ्रामक बताया है। सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा गया है कि बोर्ड में शामिल होने के लिए कोई न्यूनतम शुल्क तय नहीं किया गया है। यह बोर्ड केवल उन्हीं साझेदार देशों को स्थायी सदस्यता देगा, जो शांति, सुरक्षा और खुशहाली के लिए गहरी प्रतिबद्धता दिखाते हैं।
सुरक्षा व्यवस्था भी होगी मजबूत
गाजा में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स को इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स (आईएसएफ) का कमांडर नियुक्त किया गया है। वे सुरक्षा अभियानों की निगरानी करेंगे और हथियारों से मुक्त वातावरण, मानवीय सहायता तथा निर्माण सामग्री की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
कुल मिलाकर, गाजा के लिए यह शांति पहल वैश्विक स्तर पर एक बड़े कूटनीतिक प्रयास के रूप में देखी जा रही है। भारत को मिला यह न्योता अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी बढ़ती भूमिका और भरोसे को रेखांकित करता है।



