Gangster Murder: ताइक्वांडो ट्रेनर से जरायम का मास्टरमाइंड बना विक्रम शर्मा, देहरादून में हत्या के बाद खुली अपराध की पूरी फाइल

देहरादून/जमशेदपुर।
Dehradun में झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर विक्रम शर्मा की हत्या के बाद उसकी आपराधिक दुनिया की पूरी कहानी एक बार फिर चर्चा में है। कभी ताइक्वांडो सिखाने वाला विक्रम समय के साथ ऐसा अपराधी बना, जिसका नाम झारखंड के बड़े हत्याकांडों और बम धमाकों में साजिशकर्ता के तौर पर सामने आया। Jamshedpur में कई सनसनीखेज मामलों में उसकी भूमिका रही है।

ताइक्वांडो से जरायम तक का सफर

विक्रम शर्मा मूल रूप से उत्तराखंड का रहने वाला था। उसके पिता अमित लाल नौकरी के सिलसिले में Tata Steel में कार्यरत थे, जिस कारण परिवार झारखंड शिफ्ट हुआ। विक्रम को ताइक्वांडो का गहरा शौक था और वह तत्कालीन बीएमपी ग्राउंड में बच्चों और युवाओं को प्रशिक्षण दिया करता था।
इसी दौरान झारखंड का कुख्यात गैंगस्टर अखिलेश सिंह उसका छात्र बना। विक्रम का छोटा भाई अरविंद शर्मा अखिलेश का करीबी दोस्त था, जिससे दोनों परिवारों के बीच घरेलू संबंध भी बन गए।

अपराध की दुनिया में पहला कदम

वर्ष 1999 में तेल कारोबारी ओम प्रकाश काबरा के अपहरण कांड ने विक्रम को पहली बार पुलिस के रडार पर ला दिया। इस मामले में पुलिस ने विक्रम के घर छापा मारा। यही वह पल था, जब विक्रम का नाम एक आरोपी के तौर पर दर्ज हुआ और यहीं से उसने अपराध की दुनिया में कदम रख दिया।
छापेमारी के दौरान पुलिस को पिंकी की तस्वीर भी मिली, जो कारोबारी अशोक शर्मा की पत्नी थी। इससे पहले, 1998 में विक्रम के भाई अरविंद शर्मा ने अशोक शर्मा की हत्या कर दी थी। बाद में अरविंद ने पिंकी से शादी कर ली। यह मामला आज भी पुलिस के लिए एक चुनौती बना हुआ है, क्योंकि अरविंद अब तक गिरफ्त से बाहर है।

हत्याएं, फायरिंग और बम धमाके

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, ओम प्रकाश काबरा कांड के बाद विक्रम शर्मा का नाम लगातार बड़े अपराधों में सामने आता रहा।
सिदगोड़ा थाना क्षेत्र के अधिकारियों के मुताबिक, टाटा स्टील के सुरक्षा अधिकारी जयराम की हत्या और बम धमाके की घटनाओं में भी विक्रम की साजिश सामने आई। इन वारदातों को उसने अखिलेश सिंह के साथ मिलकर अंजाम तक पहुंचाया। फिलहाल अखिलेश सिंह Dumka की जेल में बंद है।

विक्रम पर जिन मामलों में साजिशकर्ता होने के आरोप लगे, उनमें शामिल हैं—

  1. श्री लेदर्स के मालिक आशीष डे की हत्या

  2. रवि चौरसिया पर फायरिंग

  3. पूर्व जज आर.पी. रवि पर गोलीबारी

  4. कांग्रेस नेता नट्टू झा के कार्यालय पर फायरिंग

‘थ्री-पी’ यानी पॉलिटिक्स, प्रेस और पुलिस में पकड़

सूत्रों के अनुसार, विक्रम शर्मा ‘थ्री पी’—पॉलिटिशियन, प्रेस और पुलिस—तीनों में मैनेजमेंट का माहिर था। झारखंड के कई बड़े नेताओं से उसके करीबी संबंध बताए जाते हैं। इतना ही नहीं, वह आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहा था। चुनावी रणनीति की जिम्मेदारी उसने जेल में बंद अखिलेश सिंह को सौंपी थी, जो वहीं से नेटवर्क संभाल रहा था।

न्यूज पोर्टल और रंगदारी का नेटवर्क

झारखंड पुलिस सूत्रों का दावा है कि विक्रम शर्मा एक न्यूज पोर्टल भी संचालित करता था, जिसमें उसके कुछ साझेदार शामिल थे। आरोप है कि वह इस माध्यम से लोगों को ब्लैकमेल कर रंगदारी वसूलता था। आम लोगों और कारोबारियों में उसका खौफ इस कदर था कि उसके खिलाफ बोलने से भी लोग कतराते थे।

हत्या के बाद फिर सुर्खियों में

कई बार विक्रम की मौत की अफवाहें फैलीं, लेकिन हर बार वह नए अपराधों के साथ सामने आया। अब देहरादून में हुई उसकी हत्या ने न सिर्फ झारखंड बल्कि उत्तराखंड की पुलिस को भी सतर्क कर दिया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर विक्रम के अंत के पीछे किसका हाथ है और क्या यह किसी पुराने गैंगवार का नतीजा है।

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