निजी शैक्षणिक संस्थान की मनमानी: कर्मचारियों को वेतन नहीं

भले ही वैश्विक महामारी कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन के दौरान केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने निर्देश जारी किए थे कि किसी भी संस्थान द्वारा कर्मचारी की तनख्वाह न रोकी जाए । लेकिन गुजरते समय के साथ साथ विभिन्न निजी संस्थानों द्वारा सरकार की तरफ से जारी दिशा-निर्देशों को अपनी सहूलियत के अनुसार प्रयोग करने की खबरें सामने आने लगीं हैं ।

ऐसा ही एक वाकया दून घाटी कॉलेज ऑफ़ प्रोफेशन एजुकेशन डोईवाला देहरादून का निकल कर आया है । डा० भवेंद्र चंद्र और पीयूष कुमार द्वारा उत्तराखंड न्यूज 24 को बताया गया कि वे उक्त संस्थान में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात थे । कोरोना के चलते लॉकडाउन के बाद पूरे देश की तरह सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के तहत भवेंद्र और पीयूष भी अपने अपने घरों में ही रहने को मजबूर थे।

लॉकडाउन के दौरान ऑनलाईन क्लासेज के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए भवेंद्र और पीयूष ने लगातार कॉलेज प्रशासन से अपने छात्रों को ऑनलाइन क्लासेज देने का सुझाव दिय ताकि शैक्षणिक सत्र के दौरान छात्रों की पढ़ाई पर कोई फर्क न पड़े । दोनों कर्मचारियों के अनुसार कॉलेज प्रशासन ने इस हेतु निर्णय लेने में उदासीनता ही दिखाई । जबकि संस्थान छात्रों से फीस लेता रहा लेकिन क्लासेज नहीं लगाईं गईं ।

लॉकडाउन में गुजरते समय के साथ अपने परिवार के लिए भरण-पोषण की समस्या खड़ी होते देखकर दोनों कर्मचारियों ने कॉलेज प्रशासन से अपनी तनख्वाह मांगी लेकिन प्रशासन लॉकडाउन में क्लासेज न होने के कारण तनख्वाह जारी करने से पल्ला झाड़ लिया जबकि विद्यार्थियों से पूरा शुल्क वसूला जाता रहा है।

बार बार तनख्वाह हेतु सम्पर्क करने के बाद भी जब कॉलेज प्रशासन का रवैया नकारात्मक ही रहा तो मजबूर होकर भवेंद्र और पीयूष ने जिलाधिकारी देहरादून, कुलपति हे0न0ब0वि0वि0, अध्यक्ष विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, सचिव उच्च शिक्षा उत्तराखंड शासन, उच्च शिक्षा मंत्री उत्तराखंड सरकार के समक्ष अलग अलग समय पर पत्र भेजे तथा उक्त प्रकरण में मदद चाही ।

लेकिन काफी लंबे इंतजार के बाद भी किसी अधिकारी द्वारा कोई जवाब न मिलने पर अंततः उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की जानकारी दी । उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग ने जिलाधिकारी देहरादून को नोटिस भेजकर उक्त प्रकरण पर आगामी 10 फरवरी तक जवाब मांगा है । हालांकि इतनी लंबी कार्यवाही और पत्राचार के बाद भी लंबित वेतनमान का मुद्दा अभी भी हाशिये पर खड़ा है। जबकि दोंनो कर्मचारियों के सामने परिवार के भरण-पोषण की समस्या सुरसा की तरह मुंह बाए खड़ी है।

उक्त प्रकरण पर जब उत्तराखंड न्यूज 24 ने कॉलेज के प्रधानाचार्य डा. ललित मोहन शर्मा से बात करनी चाही तो उन्होंने गोल मोल सा जवाब देते हुए वेतन भुगतान की जिम्मेदारी मैनेजमेंट और चेयरमैन के पल्ले में डाल दी।

गौरतलब है कि उत्तराखंड के चर्चित “छात्रवृत्ति घोटाले” में उक्त कॉलेज का नाम भी है । इन सब प्रकरणों से यह तो साफ जाहिर है कि सरकारें और प्रशासन निजी संस्थानों के साथ मिलकर किस तरह से छात्रों और कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं ।

इतना नहीं उक्त कॉलेज की कुछ और अनियमितताओं की जानकारियां उत्तराखंड न्यूज 24 के पास हैं जिन पर जल्दी ही खुलासा किया जाएगा ।

 

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