देहरादून।
तेजी से बढ़ते शहरीकरण और कंक्रीट के फैलते जंगल का असर अब देहरादून की जलवायु पर साफ दिखाई देने लगा है। एक ताज़ा शोध में यह बात सामने आई है कि शहर में बढ़ती इमारतें, सड़कें और कंक्रीट संरचनाएं देहरादून के तापमान को लगातार बढ़ा रही हैं, जिससे शहर की पारंपरिक ठंडक प्रभावित हो रही है। यह खुलासा दून विश्वविद्यालय और नेशनल एटमॉस्फेरिक रिसर्च लैबोरेटरी (एनएआरएल) के संयुक्त अध्ययन में हुआ है।
देहरादून और मसूरी का तुलनात्मक अध्ययन
शोध के तहत विशेषज्ञों ने देहरादून और मसूरी के तापमान में शहरीकरण के प्रभावों का तुलनात्मक विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि देहरादून में तापमान बढ़ने का सीधा संबंध शहरीकरण से है, जबकि मसूरी में शहरीकरण बढ़ने के बावजूद फिलहाल तापमान में कोई उल्लेखनीय बदलाव दर्ज नहीं किया गया है।
प्री-मानसून सीजन में किया गया अध्ययन
दून विश्वविद्यालय ने यह अध्ययन गर्मी के मौसम यानी मानसून से पहले की अवधि (अप्रैल, मई और जून 2021) में किया। शोध का उद्देश्य यह समझना था कि शहरी संरचनाएं—जैसे इमारतें, सड़कें और कंक्रीट क्षेत्र—सतह और वायुमंडलीय तापमान को किस तरह प्रभावित करती हैं।
दून विश्वविद्यालय के पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधन विभाग के डॉ. उज्ज्वल के अनुसार, इस अध्ययन में डब्ल्यूआरएफ (WRF) मॉडल का उपयोग किया गया। इसमें देहरादून (लगभग 640 मीटर ऊंचाई) और मसूरी (लगभग 2005 मीटर ऊंचाई) को आधार बनाकर शहरीकरण के कारण तापमान में होने वाले बदलावों का विश्लेषण किया गया।
अर्बन स्ट्रक्चर से बढ़ती गर्माहट
शोध में दो परिदृश्यों का अध्ययन किया गया—
पहला, जब क्षेत्र में खेती की भूमि, जंगल, हवा का प्रवाह और सौर विकिरण जैसी प्राकृतिक स्थितियां मौजूद हों।
दूसरा, जब इन्हीं क्षेत्रों में शहरी संरचनाएं विकसित हों।
मॉडल से यह स्पष्ट हुआ कि देहरादून में शहरी संरचनाओं की मौजूदगी के कारण तापमान पर सीधा असर पड़ता है। खास तौर पर रात के समय शहर के मुख्य शहरी क्षेत्रों में तापमान आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक अधिक पाया गया। शहरी इलाकों में गर्म हवा देर तक बनी रहती है, जिसे ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है।
मसूरी में फिलहाल असर नहीं
वहीं, इसी मॉडल के आधार पर मसूरी में शहरीकरण के प्रभावों का आकलन किया गया, लेकिन वहां फिलहाल तापमान में कोई खास बदलाव नहीं दिखा। शोधकर्ताओं के अनुसार, यदि तापमान आकलन में शहरीकरण के प्रभावों को शामिल नहीं किया जाए, तो बदलाव नजर नहीं आता, लेकिन जब इन प्रभावों को मॉडल में जोड़ा जाता है, तो देहरादून जैसे शहरों में अंतर स्पष्ट दिखाई देता है।
अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका में प्रकाशित
इस महत्वपूर्ण अध्ययन से जुड़ा शोध पत्र ‘मेट्रोलॉजी, हाइड्रोलॉजी एंड वॉटर मैनेजमेंट’ विषयक रिसर्च जर्नल में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में एनएआरएल के विशेषज्ञ विकास सिंह की भी अहम भूमिका रही।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि समय रहते शहरी नियोजन में हरित क्षेत्रों और पर्यावरण संतुलन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में देहरादून का तापमान और अधिक बढ़ सकता है, जिससे शहर की जीवनशैली और स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।



