देहरादून: अस्पताल की लापरवाही से मचा हड़कंप, मरीज को जिंदा बताकर परिजनों को सौंपा
देहरादून जिले के हरबर्टपुर क्षेत्र में एक अस्पताल की कथित लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। यहां उपचार के लिए लाई गई एक महिला को अस्पताल से जिंदा बताकर परिजनों के हवाले कर दिया गया, जबकि बाद में अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को महिला की मौत की सूचना दे दी। इस बीच परिजन महिला को लेकर एक के बाद एक चार अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे। अंततः झाझरा स्थित एक अस्पताल में डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद क्षेत्र में काफी तनाव की स्थिति बन गई। करीब दो हजार से अधिक ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में पंचनामा भरकर शव परिजनों को सौंपा गया।
अचानक बिगड़ी थी महिला की तबीयत
जानकारी के अनुसार सहसपुर कोतवाली क्षेत्र के बैरागीवाला गांव निवासी 25 वर्षीय मुस्लिम महिला की अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजन उसे उपचार के लिए हरबर्टपुर स्थित एक संस्था के अस्पताल में लेकर पहुंचे और भर्ती कराया।
बताया जा रहा है कि उपचार के दौरान परिजन महिला को अपने साथ लेकर अस्पताल से चले गए। इसके बाद परिजन बेहतर इलाज की उम्मीद में महिला को लेकर अलग-अलग अस्पतालों में भटकते रहे।
तीन अस्पतालों ने खड़े किए हाथ
परिजन महिला को छोटे से लेकर बड़े अस्पतालों तक लेकर गए, लेकिन तीन अस्पतालों ने उसे भर्ती करने से इनकार कर दिया। इसके बाद परिजन करीब 20 किलोमीटर दूर झाझरा स्थित एक अस्पताल पहुंचे।
यहां डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि महिला की अस्पताल लाने से करीब 10 मिनट पहले ही मौत हो चुकी थी। यह सुनकर परिजन महिला का शव लेकर गांव लौट आए और सुपुर्द-ए-खाक की तैयारी शुरू कर दी।
अस्पताल ने पुलिस को भेज दी मौत की सूचना
इसी बीच शाम करीब 7 बजे हरबर्टपुर स्थित अस्पताल प्रबंधन ने सहसपुर कोतवाली पुलिस को महिला की मौत की सूचना भेज दी। सूचना मिलते ही पुलिस बैरागीवाला गांव पहुंची और पंचनामा की प्रक्रिया के लिए शव की मांग की।
हालांकि परिजनों और ग्रामीणों ने शुरुआत में शव देने से इंकार कर दिया। इससे मौके पर तनाव बढ़ गया।
दो हजार ग्रामीणों की भीड़, समझाने के बाद बनी सहमति
घटना की सूचना मिलने पर पूर्व ब्लॉक प्रमुख व स्थानीय क्षेत्र पंचायत सदस्य जसविंदर सिंह बिट्टू भी मौके पर पहुंचे। उस समय गांव में करीब दो हजार से अधिक ग्रामीण एकत्र हो चुके थे।
उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर ग्रामीणों और परिजनों को कानूनी प्रक्रिया के बारे में समझाया। करीब ढाई घंटे तक चली समझाइश के बाद मृतका के ससुराल और मायके पक्ष के लोग पंचनामा भरवाने के लिए तैयार हुए।
पोस्टमार्टम से किया इनकार
इसके बाद शव को दोबारा अस्पताल लाया गया, जहां नायब तहसीलदार की मौजूदगी में पंचनामा भरा गया। हालांकि परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया।
पंचनामा की कार्रवाई पूरी होने के बाद एसडीएम की अनुमति से शव परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया।
घटना के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और लापरवाही को लेकर क्षेत्र में सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।



