देहरादून: फर्जी लोन घोटाले में बैंक प्रबंधक समेत 14 दोषी करार, कोर्ट ने सुनाई कारावास और जुर्माने की सजा

देहरादून: फर्जी ऋण स्वीकृत करने के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने उत्तराखंड ग्रामीण बैंक के एक प्रबंधक समेत 14 आरोपियों को दोषी करार देते हुए कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद मंगलवार को अपना फैसला सुनाया।

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश की अदालत ने बैंक प्रबंधक राम अवतार सिंह दिनकर को चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उन पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने दो अन्य धाराओं के तहत भी उन्हें दोषी ठहराते हुए 15-15 हजार रुपये के जुर्माने के साथ एक-एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। यदि जुर्माने की राशि अदा नहीं की जाती है, तो दोषी को एक महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

अदालत ने इस मामले में शामिल अन्य 13 आरोपियों को भी दोषी मानते हुए प्रत्येक को एक वर्ष के कारावास और 15 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट के आदेश के अनुसार सभी आरोपियों ने मिलकर बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऋण स्वीकृत करवाए थे।

सीबीआई की जांच में सामने आया कि वर्ष 2014-15 के दौरान ऊधमसिंह नगर जिले में स्थित उत्तराखंड ग्रामीण बैंक में तैनात प्रबंधक राम अवतार सिंह दिनकर ने कुछ किसानों और डीलरों के साथ मिलीभगत कर किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और फसल ऋण योजना के माध्यम से फर्जी लोन स्वीकृत किए थे। इस प्रक्रिया में कई लोगों ने नकली दस्तावेज जमा कर बैंक से ऋण प्राप्त कर लिया था।

इस पूरे मामले का खुलासा होने के बाद वर्ष 2018 में सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आए, जिसके आधार पर आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया।

मामले में लगातार सुनवाई के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनते हुए आरोपियों को दोषी ठहराया और सजा का ऐलान किया। अदालत के इस फैसले को बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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