देहरादून में युवा डॉक्टर की संदिग्ध मौत: कार में केसीएल इंजेक्शन लगाकर दी जान, घर की इकलौती बेटी थी तन्वी

देहरादून में युवा डॉक्टर की संदिग्ध मौत: कार में केसीएल इंजेक्शन लगाकर दी जान, घर की इकलौती बेटी थी तन्वी

देहरादून: राजधानी देहरादून में एक युवा महिला डॉक्टर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। बताया जा रहा है कि डॉक्टर ने अपनी कार के अंदर बैठकर पोटेशियम क्लोराइड (केसीएल) इंजेक्शन की ओवरडोज लेकर आत्महत्या कर ली। कई घंटों तक इंजेक्शन की बूंद-बूंद उनके शरीर में जाती रही और धीरे-धीरे उनकी सांसें थम गईं। जब तक परिवार के लोग उन्हें अस्पताल पहुंचा पाते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

पुलिस और परिजनों के अनुसार, डॉ. तन्वी कार की ड्राइविंग सीट पर बैठी थीं। उन्होंने कार के अंदर ऊपर लगे हैंडल से 100 एमएल की बोतल लटकाई और उसमें पोटेशियम क्लोराइड (केसीएल) के करीब चार इंजेक्शन भर दिए। इसके बाद उस बोतल को अपने दाहिने हाथ में लगी कैनुला से जोड़ दिया। कई घंटों तक इंजेक्शन की एक-एक बूंद उनके शरीर में जाती रही और ओवरडोज के कारण उनकी सांसें धीरे-धीरे कमजोर पड़ती गईं।

बताया जा रहा है कि अगर समय रहते कोई उन्हें देख लेता और अस्पताल पहुंचा देता तो शायद उनकी जान बच सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।


पिता से फोन पर कही थी मानसिक परेशानी की बात

मृतका के पिता ललित मोहन ने बताया कि उनकी बेटी तन्वी मंगलवार रात करीब नौ बजे श्रीमहंत इन्दिरेश अस्पताल में भर्ती मरीजों को देखने के लिए घर से निकली थीं। इस दौरान उनकी बेटी से करीब एक घंटे तक फोन पर बातचीत हुई।

बातचीत के दौरान तन्वी ने खुद को मानसिक रूप से परेशान बताया और कहा कि वह अब अधिक दबाव सहन नहीं कर पा रही है। उसने पिता से कहा कि वे अंबाला से देहरादून आ जाएं और अगले दिन विभागाध्यक्ष (एचओडी) से शिकायत करेंगे। पिता ने उसे भरोसा दिलाया कि वह अगले दिन देहरादून पहुंचेंगे।


मां को भेजा मैसेज, फिर बंद हो गया फोन

करीब रात 11 बजकर 15 मिनट पर तन्वी ने अपनी मां को मैसेज कर बताया कि वह घर आने में करीब एक-डेढ़ घंटे की देरी से पहुंचेगी। तन्वी की मां उसी समय देहरादून में उनके साथ रहती थीं। उन्होंने यह बात तुरंत तन्वी के पिता को भी बता दी।

पिता के मुताबिक, बेटी ने इस तरह पहली बार मैसेज कर देर से आने की जानकारी दी थी, जिससे उन्हें शक हुआ। उन्होंने तुरंत बेटी को फोन किया, लेकिन फोन नहीं उठा। इसके बाद उन्होंने कई बार कॉल और मैसेज किए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

घबराकर ललित मोहन रात करीब 11:45 बजे अंबाला से देहरादून के लिए निकल पड़े।


कार में मिली मरणासन्न हालत में

रात करीब दो बजे वह देहरादून पहुंचे और पत्नी को साथ लेकर बेटी को ढूंढने निकले। खोजबीन के दौरान अस्पताल से कारगी रोड की ओर शनि मंदिर के आगे सड़क किनारे उनकी बेटी की कार खड़ी मिली।

कार के अंदर झांककर देखा तो तन्वी ड्राइविंग सीट पर मरणासन्न हालत में पड़ी थीं। घबराए पिता ने तुरंत पत्थर से कार का शीशा तोड़ा, बेटी को बाहर निकाला और अपनी कार में बैठाकर अस्पताल पहुंचाया। लेकिन अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

कार की दूसरी सीट पर चार इंजेक्शन के खाली वायल पड़े मिले, जबकि ऊपर लटकी बोतल पूरी तरह खाली हो चुकी थी।


परिवार की इकलौती बेटी थी तन्वी

बेटी की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पिता ललित मोहन रोते-रोते बताते हैं कि तन्वी उनकी इकलौती बेटी थी। उनका एक बेटा है जो अंबाला में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है।

उन्होंने बताया कि तन्वी अपने बैच की सबसे कम उम्र की डॉक्टरों में शामिल थी और उसका सपना बड़ा डॉक्टर बनने का था। लेकिन इस घटना ने परिवार के सारे सपनों को खत्म कर दिया।


केसीएल इंजेक्शन की अधिक मात्रा हो सकती है घातक

देहरादून के एक वरिष्ठ फिजिशियन के अनुसार, पोटेशियम क्लोराइड (केसीएल) इंजेक्शन उन मरीजों को दिया जाता है जिनके शरीर में पोटेशियम की मात्रा कम हो जाती है। लेकिन यदि शरीर में इसकी अधिक मात्रा पहुंच जाए तो हाइपरकैलीमिया की स्थिति बन सकती है।

इस स्थिति में दिल की धड़कन असामान्य हो जाती है, जिसे ऐरिद्मिया कहा जाता है। गंभीर मामलों में यह मरीज की मौत का कारण भी बन सकता है।

डॉक्टरों का कहना है कि चूंकि तन्वी स्वयं डॉक्टर थीं, इसलिए उन्हें इस इंजेक्शन के प्रभाव और उसकी घातकता के बारे में पूरी जानकारी रही होगी।

Previous articleउत्तराखंड कैबिनेट का बड़ा फैसला: गेहूं-धान खरीद पर अब केवल 2% मंडी शुल्क, प्रस्ताव को मिली मंजूरी
Next articleउत्तराखंड में पीएम सूर्यघर योजना के 5500 से अधिक लाभार्थियों को मिलेगी राज्य सब्सिडी, कैबिनेट के फैसले से खत्म होगा इंतजार