देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के उपयोग को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत ने देहरादून में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में सरकार पर इस कोष के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए हरक सिंह रावत ने कहा कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी से यह संकेत मिलते हैं कि प्रदेश के कुछ जिलों में मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष का उपयोग पारदर्शी तरीके से नहीं किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कोष की राशि का वितरण असमान रूप से किया जा रहा है, जिससे कई जरूरतमंद लोग वंचित रह जाते हैं।
रावत ने कहा कि चंपावत और उधम सिंह नगर जिलों में कुछ लोगों को हर वर्ष दो से तीन लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जबकि कई गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मात्र तीन हजार रुपये की ही मदद मिल पाती है। उन्होंने इसे गंभीर असमानता बताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में सरकार की मंशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और इसकी पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों तक सहायता पहुंच सके।
इस दौरान कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी, लालचंद शर्मा सहित पार्टी के अन्य कार्यकर्ता भी प्रेस वार्ता में मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि सरकार इस मामले में स्पष्टता नहीं देती है तो पार्टी इस मुद्दे को और जोर-शोर से उठाएगी।



