हरिद्वार में भाजपा की नई रणनीति: धामी कैबिनेट में दो मंत्रियों के जरिए साधे जाएंगे राजनीतिक समीकरण
उत्तराखंड में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में हरिद्वार जिले में अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाने के बाद भारतीय जनता पार्टी अब यहां अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की तैयारी में जुट गई है। इसी रणनीति के तहत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मंत्रिमंडल विस्तार में हरिद्वार नगर से पांच बार के विधायक मदन कौशिक और रुड़की से लगातार तीसरी बार विधायक बने प्रदीप बत्रा को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इन दोनों नेताओं के अनुभव और क्षेत्रीय पकड़ के जरिए जिले की आठों विधानसभा सीटों पर संगठन को मजबूती मिलेगी और 2027 के चुनाव में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकेंगे।
2022 के नतीजों के बाद बदली रणनीति
भाजपा को वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में हरिद्वार जिले में बड़ा झटका लगा था। आठ विधानसभा सीटों वाले इस जिले में पार्टी महज तीन सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी थी। छह सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली, जबकि दो सीटें बसपा के खाते में गई थीं। इसके अलावा खानपुर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार उमेश कुमार विजयी रहे थे।
बाद में मंगलौर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा और यह सीट कांग्रेस के खाते में चली गई। सत्ता में रहते हुए उपचुनाव हारना भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना गया। इसके बाद संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर यह तय किया गया कि हरिद्वार में खोई राजनीतिक जमीन को फिर से हासिल करने के लिए विशेष रणनीति बनाई जाएगी।
अमित शाह की रैली से लेकर मंत्रिमंडल विस्तार तक संकेत
हरिद्वार में भाजपा की सक्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की बड़ी रैली के बाद अब मंत्रिमंडल विस्तार में जिले के दो विधायकों को मंत्री पद देकर संगठन को मजबूत करने का संदेश दिया गया है।
इसके अलावा पार्टी ने जिले के सात नेताओं को विभिन्न दर्जाधारी पदों पर जिम्मेदारी देकर हारी हुई सीटों पर संगठन को सक्रिय करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
मदन कौशिक और प्रदीप बत्रा की भूमिका अहम
हरिद्वार नगर से पांच बार विधायक रहे मदन कौशिक को चुनावी रणनीति बनाने में माहिर माना जाता है। पार्टी उन्हें मैदानी क्षेत्रों और ब्राह्मण मतदाताओं के बीच मजबूत पकड़ वाले नेता के रूप में देखती है।
वहीं रुड़की से तीन बार विधायक बने प्रदीप बत्रा का प्रभाव व्यापारी वर्ग और रुड़की के आसपास के क्षेत्रों में माना जाता है। भाजपा की रणनीति है कि बत्रा के जरिए इन क्षेत्रों में संगठन को और मजबूत किया जाए।
सात दर्जाधारियों को भी मिली जिम्मेदारी
भाजपा ने जिले में संगठन को मजबूत करने के लिए सात नेताओं को दर्जाधारी पदों पर जिम्मेदारी दी है। इनमें ओमप्रकाश जमदग्नि, डॉ. जयपाल सिंह, सुनील सैनी, शोभाराम प्रजापति, श्यामवीर सैनी, देशराज कर्णवाल और अजीत कुमार शामिल हैं।
ये सभी नेता अपने-अपने क्षेत्रों में पहले से सक्रिय रहे हैं और अब संगठनात्मक जिम्मेदारी मिलने के बाद इनसे पार्टी को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
2017 में आठ सीटें, 2022 में सिमटकर तीन
हरिद्वार जिले में भाजपा का प्रदर्शन पिछले चुनावों में उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को जिले में पांच सीटें मिली थीं। इसके बाद 2017 के चुनाव में पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी आठ सीटों पर जीत दर्ज की थी।
लेकिन 2022 में स्थिति पूरी तरह बदल गई और भाजपा की सीटें घटकर तीन रह गईं। यही कारण है कि पार्टी अब 2027 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए हरिद्वार में विशेष फोकस कर रही है।
जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश
प्रदेश सरकार ने दर्जाधारी पदों और मंत्रियों के चयन में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया है। रुड़की क्षेत्र में श्यामवीर सैनी, शोभाराम प्रजापति और अजीत चौधरी के जरिए रुड़की नगर और मंगलौर जैसी सीटों को साधने की रणनीति बनाई गई है।
अनुसूचित समाज से आने वाले देशराज कर्णवाल को राज्य मंत्री का दर्जा देकर झबरेड़ा विधानसभा क्षेत्र में पार्टी की पकड़ मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
इसके साथ ही सैनी समाज की बहुलता को ध्यान में रखते हुए श्यामवीर सैनी और सुनील सैनी के अलावा राज्यसभा सांसद कल्पना सैनी को भी राजनीतिक समीकरण में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भाजपा को उम्मीद है कि मंत्रियों और दर्जाधारियों की यह टीम हरिद्वार जिले में संगठन को मजबूती देगी और आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी को बेहतर परिणाम दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी।



