नई दिल्ली।
भारतीय सेना ने गुरुवार को वर्ष 2026 को औपचारिक रूप से ‘नेटवर्किंग और डेटा-केंद्रितता का वर्ष’ घोषित कर दिया है। सेना का कहना है कि इस पहल के जरिए कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाएगा, वास्तविक समय (रियल-टाइम) में निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी और युद्ध प्रभावशीलता में उल्लेखनीय सुधार होगा। इसका उद्देश्य भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप एक लचीली, सक्षम और फुर्तीली सेना का निर्माण करना है।
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने नए साल के अवसर पर अपने संदेश में कहा कि भारतीय सेना इस समय एक दशक लंबे परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संयुक्तता (Jointness), आत्मनिर्भरता (Self-Reliance) और नवाचार (Innovation) आज भारतीय सैन्य शक्ति के प्रमुख स्तंभ बन चुके हैं।
सेना प्रमुख का संदेश
सेना के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर साझा किए गए अपने लिखित संदेश में जनरल द्विवेदी ने कहा,
“स्वदेशी प्रौद्योगिकियों, नए विचारों और निरंतर सुधारों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से हम सेना को अधिक सक्षम और भविष्य के लिए तैयार बना रहे हैं। नेटवर्किंग और डेटा-केंद्रितता इस परिवर्तन को नई गति प्रदान कर रही है।”
उन्होंने यह भी दोहराया कि भारतीय सेना पूरी सतर्कता और दृढ़ संकल्प के साथ देश की सीमाओं और संप्रभुता की रक्षा कर रही है।
ऑपरेशन सिंदूर जारी
सेना प्रमुख ने अपने संदेश में ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले वर्ष इस अभियान के तहत दृढ़ और निर्णायक कार्रवाई के जरिए दुश्मन के नापाक मंसूबों का मुंहतोड़ जवाब दिया गया था।
उन्होंने जोर देकर कहा,
“ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत शुरू किया गया यह अभियान आज भी जारी है और सेना हर चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।”
क्यों जरूरी है नेटवर्किंग और डेटा-केंद्रितता
भारतीय सेना की ओर से जारी एक अन्य पोस्ट में कहा गया कि स्वदेशीकरण, रक्षा आधुनिकीकरण और डिजिटल एकीकरण से प्रेरित यह पहल सेना की कनेक्टिविटी, रियल-टाइम निर्णय क्षमता और युद्ध प्रभावशीलता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। इससे न केवल सैन्य अभियानों में तेजी आएगी, बल्कि भविष्य के युद्ध परिदृश्य में सेना की तत्परता और लचीलापन भी मजबूत होगा।
गौरतलब है कि 11 नवंबर को आयोजित एक सेमिनार में जनरल द्विवेदी ने संकेत दिया था कि भारतीय सेना 2026-27 को नेटवर्किंग और डेटा-केंद्रितता का वर्ष घोषित करने की दिशा में काम कर रही है। उस दौरान उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि यह ऐसा क्षेत्र है, जिसमें अभी तेजी से कार्रवाई करने की जरूरत है।
पहले भी तय किए गए थे थीम वर्ष
भारतीय सेना इससे पहले 2024-25 को ‘प्रौद्योगिकी आत्मसातकरण वर्ष’ घोषित कर चुकी है। उस पहल का उद्देश्य नई तकनीकों को तेजी से अपनाना और उन्हें सैन्य ढांचे में प्रभावी ढंग से लागू करना था।
बेस अस्पताल का दौरा
एक अन्य जानकारी में सेना ने बताया कि जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने गुरुवार को दिल्ली कैंट स्थित बेस अस्पताल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सेवारत सैनिकों और इलाज करा रहे पूर्व सैनिकों से मुलाकात की। सेना प्रमुख ने विपरीत परिस्थितियों में भी उनके जुझारू जज्बे की सराहना की और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
भारतीय सेना का यह फैसला स्पष्ट संकेत है कि आने वाले वर्षों में सेना डिजिटल, डेटा-ड्रिवन और तकनीक-समर्थित युद्ध क्षमताओं पर विशेष फोकस करेगी, ताकि देश की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।



