श्रीनगर गढ़वाल में रिकॉर्ड: ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना की टनल-8 बनी देश की सबसे लंबी रेल सुरंग

श्रीनगर गढ़वाल: उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश–कर्णप्रयाग ब्रॉड गेज रेल परियोजना ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत निर्माणाधीन टनल संख्या–8 अब देश की सबसे लंबी रेल सुरंग बन गई है। लगभग 14.58 किलोमीटर लंबी यह सुरंग देवप्रयाग से जनासू के बीच बनाई जा रही है और इसे 125 किलोमीटर लंबे इस रेल प्रोजेक्ट की रीढ़ माना जा रहा है।

यह परियोजना राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में विकास की नई दिशा खोलने के साथ ही आधुनिक इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षमता का प्रतीक बनकर उभरी है।

आधुनिक तकनीक से तैयार हो रही सुरंग

टनल-8 के निर्माण में अत्याधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग किया गया है। सुरंग की खुदाई के लिए टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का प्रयोग किया गया, जिससे मजबूत चट्टानी क्षेत्रों में तेज और सटीक कार्य संभव हुआ। वहीं, कमजोर और जटिल भू-भाग में न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मैथड (एनएटीएम) अपनाया गया, जिसमें लगातार निगरानी के साथ सुरक्षित निर्माण सुनिश्चित किया गया।

सुरंग के भीतर दोहरी रेल लाइन के लिए पर्याप्त चौड़ाई, उन्नत जल निकासी प्रणाली, वेंटिलेशन शाफ्ट (हवा के प्रवाह के लिए मार्ग) और आपातकालीन निकास (एस्केप पैसेज) जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जो इसे तकनीकी रूप से अत्यंत उन्नत बनाती हैं।

चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बड़ी उपलब्धि

हिमालयी क्षेत्र में स्थित यह सुरंग भूकंपीय जोन-4 में आती है, जहां निर्माण कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। खुदाई के दौरान पानी का रिसाव, फॉल्ट जोन, ढीली चट्टानें, उच्च दबाव और तापमान जैसी कई बाधाएं सामने आईं। इसके अलावा, सीमित पहुंच और कठिन लॉजिस्टिक्स ने कार्य को और जटिल बना दिया।

इन सभी चुनौतियों के बावजूद इंजीनियरों और श्रमिकों ने निरंतर प्रयास करते हुए सुरंग के दोनों सिरों का सफल मिलान (ब्रेकथ्रू) कर दिखाया, जिसे परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है।

रेल परियोजना से होंगे बहुआयामी लाभ

ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना के पूर्ण होने के बाद उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। बदरीनाथ और केदारनाथ जैसे चारधाम स्थलों तक पहुंच आसान होगी, जिससे पर्यटन और तीर्थाटन को नई गति मिलेगी।

इसके साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, व्यापार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। आपदा के समय तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद परिवहन सुविधा भी उपलब्ध हो सकेगी।

अधिकारियों ने जताई खुशी

रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के मुख्य परियोजना प्रबंधक हिमांशु बडोनी ने कहा कि टनल-8 का ब्रेकथ्रू इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। उन्होंने बताया कि अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी पूरी टीम ने समर्पण और उत्कृष्टता के साथ कार्य करते हुए इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल किया है।

यह सुरंग न केवल उत्तराखंड के विकास को नई गति देगी, बल्कि देश के इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

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