टिहरी गढ़वाल: उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में एलपीजी गैस की किल्लत को लेकर जनाक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। टिहरी जनपद के घनसाली क्षेत्र में सोमवार को इस समस्या के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। पूर्व विधायक भीम लाल आर्य के नेतृत्व में निकाली गई इस रैली ने क्षेत्र में गैस संकट और प्रशासन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
घनसाली बैरियर से इंडियन गैस एजेंसी तक निकाली गई रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रदेश सरकार और स्थानीय विधायक के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान पूर्व विधायक भीम लाल आर्य ने कंधे पर खाली गैस सिलिंडर रखकर प्रतीकात्मक विरोध जताया, जो लोगों के गुस्से का केंद्र बन गया।
पूर्व विधायक भीम लाल आर्य ने कहा कि घनसाली विधानसभा क्षेत्र भौगोलिक रूप से सीमांत होने के बावजूद धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। चारधाम यात्रा के दौरान यहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन गैस की भारी किल्लत के कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ होटल व्यवसायी भी परेशान हैं। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा मार्ग से जुड़े घनसाली और चमियाला जैसे कस्बों में गैस आपूर्ति ठप होने से पर्यटन कारोबार प्रभावित हो रहा है।
प्रदर्शन के दौरान अंकिता भंडारी हत्याकांड का मुद्दा भी उठाया गया। कांग्रेस नेताओं ने आरोपियों को शीघ्र फांसी देने की मांग करते हुए सरकार पर कार्रवाई में देरी का आरोप लगाया।
वहीं, भिलंगना ब्लॉक के ज्येष्ठ प्रमुख और कांग्रेस नेता प्यार सिंह बिष्ट ने बताया कि चारधाम यात्रा अपने चरम पर है, लेकिन गैस की कमी के चलते होटल संचालक यात्रियों को भोजन तक उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई लोगों ने घरेलू गैस सिलिंडर की ऑनलाइन बुकिंग कर रखी है, इसके बावजूद उन्हें समय पर गैस नहीं मिल रही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डीएससी (डिस्ट्रिक्ट सप्लाई चेन) की व्यवस्था होने के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात नहीं सुधरे हैं। बिष्ट ने कहा कि सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
कांग्रेस कमेटी के ब्लॉक अध्यक्ष लक्ष्मी प्रसाद जोशी ने कहा कि यह धरना-प्रदर्शन भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ है और जब तक गैस संकट का समाधान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
घनसाली में बढ़ती गैस किल्लत ने न केवल आम लोगों की रसोई को प्रभावित किया है, बल्कि चारधाम यात्रा के दौरान क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और पर्यटन गतिविधियों पर भी नकारात्मक असर डालना शुरू कर दिया है।



