उत्तराखंड कांग्रेस में नहीं थम रही अंदरूनी खटास, ‘हरदा’ की फल पार्टी से बड़े नेता रहे दूर

देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान कम होने का नाम नहीं ले रही है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (हरदा) की ओर से आयोजित फल पार्टी भी पार्टी के भीतर की खटास को दूर नहीं कर सकी। जहां एक ओर बड़ी संख्या में समर्थक और कार्यकर्ता कार्यक्रम में शामिल हुए, वहीं दूसरी ओर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इससे दूरी बनाए रहे।

देहरादून स्थित आवास पर आयोजित इस फल पार्टी में तरबूज, खरबूज, ककड़ी जैसे मौसमी फलों के साथ पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों का भी विशेष इंतजाम किया गया था। हरदा ने इस आयोजन के लिए सभी नेताओं को खुला निमंत्रण दिया था, लेकिन इसके बावजूद कई प्रमुख चेहरे कार्यक्रम में नजर नहीं आए।

बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी बनी चर्चा का विषय

कार्यक्रम से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत सहित कई वरिष्ठ नेता नदारद रहे। बताया जा रहा है कि ये सभी नेता टिहरी में आयोजित पार्टी की रैली में व्यस्त थे।

हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस अनुपस्थिति को लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं, जिससे पार्टी के भीतर जारी मतभेद एक बार फिर उजागर हो गए हैं।

अवकाश के बाद भी सक्रिय नहीं हुए हरदा

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत हाल ही में अपने 15 दिन के अवकाश को लेकर भी चर्चा में रहे। उनका अवकाश 10 अप्रैल को समाप्त हो चुका है, लेकिन उन्होंने अब तक सक्रिय राजनीति में वापसी को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है। अवकाश के दौरान उन्होंने पार्टी के कार्यक्रमों से भी दूरी बनाए रखी।

फल पार्टी के आयोजन के बाद भी उनके भविष्य को लेकर स्थिति साफ नहीं हो पाई है। स्वयं हरीश रावत ने कहा कि वे अपने अवकाश के प्रभाव पर मंथन कर आगे की रणनीति तय करेंगे।

“अपनों को निमंत्रण नहीं दिया जाता” – यशपाल आर्य

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि परिवार या अपने लोगों को अलग से निमंत्रण देने की जरूरत नहीं होती। उन्होंने स्पष्ट किया कि टिहरी में पार्टी की रैली होने के कारण वे वहां मौजूद थे और यदि रैली नहीं होती तो निश्चित रूप से फल पार्टी में शामिल होते।

पहाड़ी उत्पादों को बढ़ावा देने की पहल

हरीश रावत ने इस आयोजन को गैर-राजनीतिक बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों और संस्कृति को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस सरकार के दौरान नदियों के किनारे की जमीन खेती के लिए कश्यप समाज को दी गई थी, जहां आज तरबूज, खरबूज और ककड़ी की खेती की जा रही है।

कार्यक्रम में मौसमी फलों के साथ बुरांश और नींबू का जूस, जौनसार क्षेत्र की टमाटर चटनी, भट्ट की चुटकानी, लाल भात और हरिद्वार का गुड़ परोसा गया।

राजनीतिक संदेश भी छिपा

हालांकि इसे गैर-राजनीतिक कार्यक्रम बताया गया, लेकिन पार्टी के बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी ने इस आयोजन को पूरी तरह सियासी रंग दे दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आयोजन कांग्रेस के भीतर जारी गुटबाजी और मतभेदों को उजागर करता है, जो आने वाले समय में पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है।


इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि उत्तराखंड कांग्रेस में अंदरूनी एकजुटता अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिसे दूर करने के लिए केवल प्रतीकात्मक आयोजनों से काम नहीं चलेगा।

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