हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में फर्जी भारतीय दस्तावेजों के सहारे रह रही एक बांग्लादेशी महिला को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इस मामले में महिला की मदद करने वाले एक दिव्यांग युवक को भी हिरासत में लिया है। आरोपी महिला के पास से बांग्लादेश के मूल दस्तावेजों के साथ कई फर्जी भारतीय पहचान पत्र बरामद हुए हैं। पुलिस अब इस पूरे मामले में फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क की भी जांच कर रही है।
जानकारी के अनुसार जिले में अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान करने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन प्रहार के तहत ज्वालापुर पुलिस और एलआईयू की संयुक्त टीम सत्यापन अभियान चला रही थी। इसी दौरान ज्वालापुर क्षेत्र में रामानंद कॉलेज के पास वैष्णवी एन्क्लेव में एक महिला संदिग्ध परिस्थितियों में मिली। पुलिस टीम ने जब उससे पूछताछ की तो उसके जवाबों में लगातार विरोधाभास सामने आया।
इस पर पुलिस ने महिला की गहन जांच की तो उसने अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर भारत में रहने की बात स्वीकार कर ली। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।
रोशनाबाद स्थित पुलिस कार्यालय सभागार में पत्रकारों से बातचीत करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह ने बताया कि गिरफ्तार महिला की पहचान सहेला बेगम के रूप में हुई है, जो बांग्लादेश के कुमीला जिले की निवासी है। वर्ष 2023 में सोशल मीडिया के माध्यम से उसकी पहचान श्यामदास नामक युवक से हुई थी। इसी युवक के कहने पर वह भारत आई थी।
एसएसपी के अनुसार महिला का वीजा समाप्त होने के बाद भी वह अवैध रूप से भारत में रह रही थी। पहले वह दिल्ली में कुछ समय तक रही और बाद में हरिद्वार आकर रहने लगी। यहां आने के बाद उसने अपने सहयोगी श्यामदास की मदद से कई फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार करा लिए।
पुलिस जांच में सामने आया है कि महिला ने फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, भारतीय पासपोर्ट और विवाह प्रमाणपत्र जैसे कई दस्तावेज बनवा लिए थे और लंबे समय से फर्जी पहचान के सहारे रह रही थी।
पुलिस ने महिला के कब्जे से बांग्लादेशी पासपोर्ट, नेशनल आईडी कार्ड सहित कई संदिग्ध भारतीय दस्तावेज बरामद किए हैं। वहीं दस्तावेज तैयार कराने में मदद करने वाले दिव्यांग युवक को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। साथ ही इस मामले में फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह और संभावित अन्य लोगों की भूमिका की भी गहन जांच शुरू कर दी गई है।



